कहीं अगला शिकार आप तो नहीं

Rape
भोपाल। भले संसद में महिला आरक्षण विधेयक पास होने की दहलीज पर खड़ा हो और इस उपलब्धि के साथ भारत में महिलाओं की नयी सुबह होने जा रही हो। लेकिन महिलाओं की इन उपलब्धियों से पुरुष किस कदर आतंकित और आक्रोशित है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश में महिलाओं पर अत्याचार और उत्पीड़न के निरंतर नये आंकड़े और घटनाएं सामने आ रही हैं।

अभी तक माना जाता रहा है कि देश में महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित जगह राजधानी दिल्ली है। अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल ने भी इस सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया है। इस समय मध्य प्रदेश में महिलाओं के लिए सबसे अधिक खतरनाक जगह भोपाल हैं। जहां हर रोज लगभग आठ महिलाएं हवस का शिकार बन रही हैं। यह तथ्य एक सरकारी ब्यौरे में उजागर हुआ है।

हर दिन 8 महिलाएं

एक तरफ देश में महिला सशक्तिकरण का चेहरा राष्ट्रपति प्रतिभा सिंह पाटिल हैं वहीं दूसरी ओर देश की राजधानी से लेकर राज्यों की राजधानी तक में महिलाएं हर घंटे पुरुष की हवस का शिकार बन रही हैं। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने मंगलवार को विधानसभा में अपराधों का ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए बताया कि 16 जून 2009 से 15 फरवरी 2010 अर्थात आठ माह की अवधि में प्रदेश में 1876 महिलाएं दरिंदों का शिकार बनी हैं। इसमे प्रदेश की राजधानी अव्वल है, जहां इस दौरान 94 महिलाओं को अपनी आबरू लूटी गयी है।

मध्य प्रदेश: बच्चा-बच्चा है कर्ज में डूबा हुआ

आठ महीने यानी 240 दिन में 1876 महिलाओं को हवस का शिकार बनना पड़ा है। इससे जाहिर होता है कि हर रोज लगभग आठ महिलाओं की इज्जत पर हाथ डाला जा रहा है। इस मामले मे छिंदवाडा दूसरे नंबर पर है, जहां इसी अवधि मे 90 महिलाओं को शिकार बनना पड़ा हैं। इसके अलावा बैतूल में 86, जबलपुर में 83, सतना में 81, धार में 75 और सागर में 73 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए हैं।

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