जेल से छूटने के बाद भी शर्मिला भूख हड़ताल पर
एक अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा कि 14 मार्च को 38 साल की होने जा रहीं शर्मिला को सोमवार को स्थानीय अदालत ने एक साल की सजा पूरी करने के बाद रिहा कर दिया था। हालांकि उनकी हालत नाजुक बनी हुई है और पुलिस उन पर नजर बनाए हुए है।
लेखिका से मानवाधिकार कार्यकर्ता बनीं शर्मिला की देखरेख करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि भूख हड़ताल से उनके आंतरिक अंग खराब हो रहे हैं। सजा के दौरान उन्हें इम्फाल के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में रखा गया था।
शर्मिला ने पत्रकारों से कहा कि एएफएसपीए वापस लेने तक भूख हड़ताल तोड़ने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता क्योंकि इस कठोर कानून के दुरुपयोग से कई लोग मारे गए हैं।
इससे पहले वह राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य राष्ट्रीय नेताओं की भूख हड़ताल खत्म करने की अपील खारिज कर चुकी हैं।
आतंकवादियों ने दो नवंबर 2000 को हवाई अड्डे के निकट उस समय बम विस्फोट किया था जब असम रायफल्स के कुछ वाहन वहां से गुजर रहे थे हालांकि इस विस्फोट में कोई हताहत नहीं हुआ था।
असम रायफल्स के जवानों ने बाद में उसी इलाके में 10 लोगों को गोली मार दी थी। इसी के विरोध में शर्मिला ने आमरण अनशन शुरू किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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