भोपाल में महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित

देश में जहां महिलाओं के सशक्तिकरण की वकालत हो रही है वहीं मध्य प्रदेश में महिलाओं की इज्जत को तार-तार करने की बढ़ती घटनाएं उस चेहरे को बेनकाव करती है, जो इन कोशिशों में बाधक बने हैं।

प्रदेश के गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता द्वारा मंगलवार को विधानसभा में अपराधों का ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए बताया कि 16 जून 2009 से 15 फरवरी 2010 अर्थात आठ माह की अवधि में प्रदेश में 1876 महिलाएं दरिंदों का शिकार बनी हैं। इसमे प्रदेश की राजधानी अव्वल है, जहां इस अवधि मे 94 महिलाओं को अपनी आबरू लुटानी पड़ी है।

सरकारी ब्यौरे के मुताबिक आठ माह यानि 240 दिन में 1876 महिलाओं को हवस का शिकार बनना पड़ा है। इससे जाहिर होता है कि हर रोज लगभग आठ महिलाओं की इज्जत पर हाथ डाला जाता है। इस मामले मे छिंदवाडा दूसरे नंबर पर है, जहां इसी अवधि मे 90 महिलाओं को शिकार बनना पड़ा हैं। इसके अलावा बैतूल में 86, जबलपुर में 83, सतना में 81, धार में 75 और सागर में 73 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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