एमएफ़ हुसैन ने भारतीय पासपोर्ट सौंपा

जाने-माने चित्रकार एमएफ़ हुसैन ने अपना भारतीय पासपोर्ट दोहा स्थित भारतीय दूतावास को सौंप दिया है. उन्हे हाल में क़तर की नागरिकता मिल गई थी.
गल्फ़ टाइम्स अख़बार ने लिखा है कि 95 वर्षीय हुसैन ने रविवार को अपना पासपोर्ट जमा किया.
दूतावास के एक अधिकारी ने कहा कि क्योंकि भारत दोहरी नागरिकता को मान्यता नहीं देता इसलिए एमएफ़ हुसैन के पास अपना पासपोर्ट सौंपने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.
भारत के हिंदूवादी संगठनों ने उन पर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने और उन्हें अश्लील रुप में प्रदर्शित करने का आरोप लगाया था और देश में कई जगह उनकी चित्र प्रदर्शनी पर हमले किए गए थे.
इन हमलों और हुसैन को मिली धमकी को लेकर भारत में बुद्धिजीवियों ने चिंता ज़ाहिर की थी और दुख जताया था.
इसके बाद वर्ष 2006 में वे देश से बाहर चले गए थे और तब से वे दुबई या लंदन में रह रहे हैं.
‘भारत की शान’
हालांकि एमएफ़ हुसैन ने क़तर की नागरिकता के लिए कोई आवेदन नहीं किया था.
क़तर के शाही परिवार ने सम्मान स्वरूप उन्हे नागरिकता देने का प्रस्ताव किया था जिसे उन्होने स्वीकार कर लिया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ गल्फ़ टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि एमएफ़ हुसैन की क़तर स्थित भारतीय राजदूत दीपा गोपालन वाधवा से दो घंटे बातचीत हुई. हुसैन ने ओवरसीज़ सिटिज़न ऑफ़ इंडिया या ओसीआई कार्ड के लिए आवेदन किया है.
भारत सरकार हुसैन को भारत का गौरव कहती है और उसने उन्हे सुरक्षा प्रदान करने का वादा किया था.
विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा था, "हुसैन भारत की शान हैं और हम चाहते हैं कि वो भारत में सुरक्षित अनुभव करें."
पासपोर्ट सौंपने के बाद हुसैन ने कहा कि हालांकि उन्होंने अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ दी है लेकिन वो हमेशा भारतीय ही कहलाएँगे.
उन्होने कहा, "नागरिकता और पासपोर्ट महज़ काग़ज़ का टुकड़ा हैं. क़तर की नागरिकता स्वीकार करने का मतलब ये नहीं कि मैं भारतीय या भारत का कलाकार नहीं रहा. भारतीय होना मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मुझे अब भी लाखों भारतीय बहुत प्यार करते हैं."
हुसैन के चित्रों को लेकर चल रहे विवाद पर कई मामले अदालत में लंबित हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सारे मामले दिल्ली की एक अदालत में स्थानांतरित कर दिए गए हैं.












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