बर्मा में नए चुनाव क़ानून पारित

बर्मा की सैनिक सरकार ने नए चुनाव क़ानून पारित किए हैं जिससे इस साल चुनाव कराने का रास्ता साफ़ हो गया है.
इन क़ानूनों का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया गया है लेकिन समझा जा रहा है कि इनमें चुनाव अभियान और उम्मीदवारों की संख्या जैसे विषय शामिल होंगे.
अभी तक सरकार ने चुनाव की तारीख़ की घोषणा नहीं की है. पिछले 20 साल से बर्मा में बहुदलीय चुनाव नहीं हुए हैं.
लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची इस चुनाव में खड़ी नहीं हो सकतीं और उनकी पार्टी ने अभी तक फ़ैसला नहीं किया है कि वह चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारेगी या नहीं.
बर्मा के सरकारी मीडिया का कहना है कि इन पांच नए क़ानूनों का ब्यौरा मंगलवार को प्रकाशित किया जाएगा.
इन क़ानूनों में इस बात का ब्यौरा होगा कि उम्मीदवार कितने समय तक चुनाव अभियान कर सकते हैं और हर चुनाव क्षेत्र के लिए कितने उम्मीदवार खड़े हो सकते हैं.
वर्ष 1990 में अंतिम आम चुनाव हुआ था जिसमें सू ची की नेशनल लीग फ़ॉर डैमोक्रेसी पार्टी को भारी विजय हासिल हुई थी लेकिन बर्मा की सैनिक सरकार ने चुनाव परिणाम रद्द कर दिए थे.
चुनाव प्रक्रिया से बाहर सू ची
बर्मा के प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सू ची इन चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाएंगी.
उन्होने एक ब्रिटिश शिक्षक से विवाह किया था और बर्मा के संविधान के अधीन कोई भी नागरिक जिसने किसी विदेशी नागरिक से विवाह किया हो राजनीतिक पद नहीं संभाल सकता.
सू ची पिछले दो दशकों से नज़रबंद हैं और पिछले साल अगस्त में ये अवधि नवंबर 2010 तक बढ़ा दी गई थी.
इससे सेना ने यह सुनिश्चित कर लिया कि सू ची किसी और उम्मीदवार के लिए भी अभियान नहीं कर सकेंगी.
हालांकि अभी तक उनकी पार्टी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह चुनाव में हिस्सा लेगी या नहीं. पार्टी का मानना है कि बर्मा के संविधान के अधीन जो भी चुनाव कराए जाएंगे वो स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं हो सकते.
जनरल थान श्वे ने कहा है कि सरकार ने जो सात चरणों वाला जो रोडमैप तैयार किया है उसी के ज़रिए बर्मा में लोकतंत्र की स्थापना हो सकती है.
जनवरी में उन्होने बर्मा के लोगों से आगामी चुनाव में सही विकल्प चुनने का आग्रह किया था.
संवाददाताओं का कहना है कि बहुत से लोग इसे सेना की चेतावनी के रूप में देखेंगे.












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