अमेरिका को भारत के साथ परस्पर सहमति बढ़ने की उम्मीद
वाशिंगटन, 6 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि अपने देश के राष्ट्रीय हितों के झुकाव के साथ उन्हें भारत के साथ परस्पर सहमति बढ़ने की उम्मीद है । भारत, दुनिया की उभरती शक्ति है और उसकी भूमिका वास्तव में इस सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री (दक्षिण और मध्य एशिया) रॉबर्ट ओ.ब्लैक ने कहा, "मेरे विचार से इस सदी में हम आर्थिक अव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, जनसंहार के हथियारों के प्रसार और आतंकवाद जैसी जिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उनसे निपटने में भारत की भूमिका वास्तव में महत्वपूर्ण होगी।"
'जॉन होपकिंस विश्वविद्यालय मॉडल संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन' में शुक्रवार को उन्होंने कहा, "भारत के एक अग्रणी गुट-निरपेक्ष देश होने के नाते संयुक्त राष्ट्र में कुछ समय तक हमारी स्थिति विषम रही और कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र की दखलंदाजी का विरोध किया।"
उन्होंने कहा, "बहरहाल हमारे राष्ट्रीय हित जुड़े हैं, आने वालों वर्षो में हमें भारत के साथ सहयोग के और समान आधार मिलने की उम्मीद है।"
ब्लैक ने कहा कि अमेरिका की तरह भारत भी संयुक्त राष्ट्र के महत्व को समझता है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के लिए प्रयासरत कई देशों में भारत का होना इस बात को दर्शाता है कि वह संयुक्त राष्ट्र को कितनी अहमियत देता है।
उन्होंने कहा कि भारत शीघ्र ही दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश होगा, वह पहले ही 10 खरब डॉलर से बड़ी अर्थव्यवस्था और उभरती विश्व शक्ति है।
ब्लैक ने पिछले वर्ष जुलाई में विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के भारत दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकी के विकास से लेकर आतंकवादियों के मुकाबले तक हर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए रणनीतिक वार्ता शुरू की गई।
उन्होंने कहा कि भारत और तीन अन्य दक्षिण एशियाई देश- पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल संयुक्त राष्ट्र शांति प्रयासों में 5,000 से अधिक और सैन्य कर्मचारियों का योगदान करते हैं। उदाहरण के लिए हैती में भूकंप के बाद उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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