तेलंगाना समर्थक वकीलों और तेदेपा कार्यकर्ताओं के बीच भिड़ंत
इंदिरा पार्क में यह टकराव उस समय हुआ जब तेदेपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के भाषण में बाधा डालते हुए वकीलों ने तेलंगाना मुद्दे पर उनका पक्ष जानना चाहा जबकि वह ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को संबोधित कर रहे थे।
'जय तेलंगाना' का नारा लगाते हुए वकीलों ने नायडू के भाषण को बाधित किया जिससे दोनों पक्षों की हाथापाई में कुछ वकीलों को चोटें आईं।
तेदेपा कार्यकर्ताओं द्वारा वकीलों पर हमले की घटना के बाद तेलंगाना के अन्य हिस्सों में वकीलों के विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। निजामाबाद जिले में वकीलों और तेलंगाना समर्थकों ने तेदेपा के कार्यालय पर हमला किया। ऐसी ही एक घटना महबूबनगर जिले में भी हुई।
तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) प्रमुख के. चंद्रशेखर राव और तेलंगाना मुद्दे पर बनी संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) के संयोजक एम. कोदांदा राम ने वकीलों पर हुए हमले की निंदा की है।
कोदांदा राम ने वकीलों पर हुए हमलों के लिए चंद्रबाबू नायडू पर आरोप लगाते हुए कहा कि तेलंगाना के तेदेपा नेताओं को अब तय कर लेना चाहिए कि उन्हें वहां की जनता के साथ रहना है या चंद्रबाबू नायडू के साथ जाना है।
तेलंगाना के तेदेपा नेता और पूर्व मंत्री कादियाम श्रीहरि ने इस घटना के लिए वकीलों से माफी मांगी है लेकिन नायडू ने कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं है क्योंकि उनके कार्यकर्ताओं ने हिंसा का सहारा नहीं लिया था।
रायलसीमा से संबंध रखने वाले नायडू ने अब तक तेलंगाना के मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है जबकि उनके पार्टी के नेताओं का रुख क्षेत्र के आधार पर बंटा हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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