प्रधानमंत्री को महिला आरक्षण विधेयक पारित होने का भरोसा (लीड-1)

प्रधानमंत्री ने यहां एक सम्मेलन में कहा, "हम महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधायिकाओं में एक-तिहाई आरक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में बढ़ रहे हैं।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारी सरकार महिलाओं के सर्वागीण सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है, चाहे इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जो भी प्रयास और संसाधन लगे।"

राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के अपनी सरकार के प्रयासों के बारे में सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों में अब करीब 40 प्रतिशत महिलाएं हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उनकी सरकार पंचायतों और शहरी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की तैयारी में है। इसके लिए संविधान संशोधन विधेयक संसद में पहले ही पेश किया जा चुका है।

विधेयक को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सोमवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा।

यह विधेयक 13 वर्षो से लंबित है। एच.डी.देवगौड़ा की सरकार ने वर्ष 1996 में इसे सबसे पहले संसद में पेश किया था।

संविधान (108वां संशोधन) विधेयक, 2008 को कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और वामदलों का समर्थन है लेकिन समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल (युनाइटेड) इसके विरोध में हैं।

विधेयक को पारित होने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत मिलना आवश्यक है। यह संख्या सदन के सदस्यों की कुल संख्या का कम से कम 50 प्रतिशत भी होनी चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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