स्वाइन फ्लू के आगे कमजोर हो सकती है टेमिफ्लू

ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी (ओएसयू) के शोधकर्ताओं ने स्वाइन फ्लू के इतिहास के बारे में पता लगाया है। एच1एन1 वायरस से पहली बार मनुष्य वर्ष 1918 में संक्रमित हुआ था।

शोधकर्ताओं के अनुसार स्वाइन फ्लू का वायरस एच1एन1 के अलावा एच1एन2 और एच3एन2 भी है। इस बीमारी से निपटने के लिए टेमिफ्लू नामक दवा का निर्माण किया गया था।

ओएसयू के अध्ययन दल के प्रमुख डेनियल जेनिस ने कहा कि वर्ष 2008 में जब स्वाइन फ्लू के चपेट में बड़ी संख्या में लोग आए तो उस समय टेमीफ्लू असरदार साबित हुई थी। उन्होंने कहा कि अब टेमीफ्लू का असर स्थिर है लेकिन स्वाइन फ्लू का प्रभाव बढ़ गया है।

शोधकर्ता एच1एन1 वायरस के प्रभाव का अध्ययन कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्वाइन फ्लू के वायरस में मौजूद एमिनो एसिड में परिवर्तन की वजह से टेमीफ्लू की प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ सकती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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