पाकिस्तान के साथ वार्ता की पहल से सिर्फ अपमान मिला : आडवाणी
अपने ब्लॉग पर आडवाणी ने कहा है, "भारत के कमजोर रुख से इस बार अपमान को आमंत्रित किया गया। हमारी विदेश सचिव ने सचिव स्तर की वार्ता को 'रचनात्मक ' करार दिया जबकि पाकिस्तानी विदेश सचिव ने इसका उपहास उड़ाया। पाक विदेश सचिव ने कहा कि उनका देश 'दिखावे के लिए बातचीत' में यकीन नहीं करता और चाहता है कि उसे क्या करना चाहिए या नहीं करना चाहिए, इस बारे में भारत 'भाषण' न दे।"
देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री ने कहा, "आतंकवाद के साथ बातचीत न करना राजग की नीति थी। जबकि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के लिए आतंकवाद और वार्ता दोनों साथ चल सकते हैं। पहले जब भारत पर हमले हुए तो हम बातचीत बंद कर देते थे। किसी तरह का संवाद न रखना एक वैधानिक राजनयिक विकल्प भी है।"
आडवाणी ने कहा कि बीते सप्ताह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इंदौर अधिवेशन के दौरान 'राष्ट्रीय सुरक्षा और जम्मू एवं कश्मीर' पर एक प्रस्ताव पारित किया गया था। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का यही मत रहा है कि आतंकवाद और वार्ता दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते।
आडवाणी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के साथ हुई आगरा शिखर वार्ता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आगरा वार्ता के दौरान हम इस रुख पर कायम रहे कि सीमा पार आतंकवाद के खत्म हुए बिना बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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