थरूर के सऊदी अरब को वार्ताकार कहने पर मचा बवाल (राउंडअप)
थरूर की इस सफाई से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संतुष्ट नहीं हुई और उसने इस पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से स्पष्टीकरण की मांग कर दी है। प्रधानमंत्री इन दिनों सऊदी अरब के तीन दिवसीय दौरे पर हैं।
यहां तक कि कांग्रेस पार्टी के लोग भी इस बात को लेकर खिन्न हैं। उन्होंने कहा है कि भारत, पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों के बीच किसी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार नहीं करेगा।
भारत सरकार के सूत्रों ने थरूर की इस टिप्पणी पर तत्काल प्रतिक्रिया जाहिर की और कहा कि भारत-पाकिस्तान के संबंधों के बीच तीसरे पक्ष का विरोध करने के नई दिल्ली के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।
प्रधानमंत्री के साथ सऊदी अरब दौरे पर गए थरूर ने भारतीय पत्रकारों से रियाद में कहा था, "हम महसूस करते हैं कि सऊदी अरब का पाकिस्तान के साथ लंबा और करीबी रिश्ता है। इस कारण वह हमारे लिए एक महत्वपूर्ण वार्ताकार हो सकता है।"
थरूर ने हालांकि स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के साथ आतंक संबंधी मुद्दों पर रियाद से सहयोग लेने की नई दिल्ली की इच्छा का अर्थ उसे दोनों पड़ोसी देशों के बीच द्विपक्षीय विवाद में मध्यस्थ की भूमिका देना नहीं है।
थरूर उस प्रश्न का जवाब दे रहे थे, जिसमें उनसे पूछा गया था कि पाकिस्तानी क्षेत्र से जारी आतंकवाद पर भारत की चिंताओं को दूर करने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाने में क्या भारत, सऊदी अरब से मदद लेना चाहेगा।
बाद में थरूर ने ट्विटर पर लिखा, "बैठकों का अच्छा-भला दिन कुछ भारतीय मीडिया द्वारा अंग्रेजी शब्द 'इंटरलॉक्यूटर' (वार्ताकार) का गलत अर्थ निकाले जाने के कारण बेमजा हो गया।"
थरूर ने लिखा है, "इंटरलॉक्यूटर वह होता है, जिससे आप बातचीत करते हैं। इससे ज्यादा इसका कोई अर्थ नहीं होता। यानी यदि मैं आपसे बात करता हूं तो आप हमारे 'इंटरलॉक्यूटर' हैं। मैंने सऊदी के लोगों को अपना 'इंटरलॉक्यूटर' (वार्ताकार) कहा था। लेकिन इसका गलत अर्थ निकाला गया।"
थरूर ने रियाद में कहा कि अलकायदा के साथ सऊदी अरब के अपने खुद के मुद्दे हैं।
उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि आतंकवाद के मुद्दे पर रचनात्मक बातचीत होगी क्योंकि यह अफगानिस्तान से इराक, लेबनान से फिलिस्तीन और अब यमन में फैल चुका है।"
थरूर ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि थरूर ने इस मामले में सऊदी अरब के लिए 'मध्यस्थ' होने या 'मध्यस्थता' करने जैसे शब्द का इस्तेमाल किया था।
मीडिया में पूर्व के बयान के प्रकाशित होने के चंद घंटों बाद थरूर ने कहा, "सऊदी अरब मध्यस्थ होगा, मेरे द्वारा ऐसा कहे जाने का सवाल ही नहीं उठता। मैंने ऐसा बिल्कुल नहीं कहा।"
थरूर की इस सफाई के बावजूद भाजपा आक्रामक बनी रही।
भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि भारत का रुख सर्वविदित है कि पाकिस्तान के साथ उसके मामले में कोई तीसरा पक्ष हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
जावड़ेकर ने कहा, "हम इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे। प्रधानमंत्री को हर हाल में जवाब देना होगा। विदेश नीति के मुद्दे पर सरकार के रुख की कलई खुल गई है।"
कांग्रेस ने हालांकि आधिकारिक तौर पर इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के एक करीबी सूत्र ने कहा, "भारत-पाकिस्तान के मामलों में तीसरे पक्ष के लिए कोई जगह नहीं है, भारत के इस रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। कांग्रेस के रुख में भी कोई बदलाव नहीं आया है।"
ज्ञात हो कि खाड़ी के सबसे प्रभावशाली देश सऊदी अरब ने नब्बे के दशक के मध्य में काबुल में तालिबानी शासन को मान्यता दी थी। साथ ही सऊदी अरब के पाकिस्तान के साथ भी अच्छे रिश्ते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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