'जैव प्रौद्योगिकी विधेयक भारतीय संविधान के खिलाफ'
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रस्तावित इस विधेयक का मसौदा मंजूरी संबंधी मामलों के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की समिति के बदले एक राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी नियाम जैसा प्राधिकरण चाहता है।
इस प्रस्तावित विधेयक में पारदर्शिता न बरतने के लिए इसकी पहले ही काफी आलोचना हो चुकी है।
प्रमुख जैव सुरक्षा विशेषज्ञ वंदना शिवा ने मंगलवार को दो खास धाराओं पर कड़ी आपत्ति की है। वंदना शिवा ने संवाददाताओं से कहा, "विधेयक में कहा गया है कि न तो हम भोजन के मामले में अपनी पसंद बना सकते हैं और न जैव सुरक्षा के बारे में ही बोल सकते हैं। यदि हम ऐसा करते हैं तो हमें जेल भेजा जा सकता है और हम पर जुर्माना किया जा सकता है। लोकतंत्र में ऐसा नहीं होता।"
शिवा ने कहा, "खाद्य सुरक्षा के अपने अधिकार की अभिव्यक्ति के लिए जेल भेजा जाना सर्वोच्च स्तर का आतंकवाद है और हम राज्य को आतंकी बनने की अनुमति नहीं देंगे।"
वंदना शिवा देश में जीएम (जीन परिवर्धित) मुक्ति आंदोलन की सफलता के उपलक्ष्य में आयोजित एक समारोह में बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि विधेयक में धारा 63 और 81 संविधान के खिलाफ हैं, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने सीधे तौर पर इस कानून का समर्थन किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications