रेल बजट में बढ़ सकता है मालभाड़ा
ऐसी संभावना है कि रेलमंत्री अपने गृह प्रदेश के लोगों को खुश करने का कोई भी मौका गंवाने वाली नहीं हैं, खासकर जब वहां अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
बनर्जी के लिए राहत की बात यह है कि रेलवे की वित्तीय हालत बहुत खराब नहीं है। आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष के पहले 10 महीनों में आय पिछले वर्ष की तुलना में 8.6 प्रतिशत बढ़कर 70,501.65 करोड़ रुपये हो गया।
रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार मालभाड़े से आय में 8.47 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यात्री किराए से आय में 7.40 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मंदी के दौर में यह काफी बेहतर प्रदर्शन माना जा सकता है।
रेल मंत्रालय को पता है कि पूरे देश में माल ढुलाई में उसका हिस्सा वर्ष 2001-02 में 24.07 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2008-09 में 20.89 प्रतिशत हो गया। वर्तमान वित्तीय वर्ष में इसके गिरकर 19.32 प्रतिशत पर आ जाने की संभावना है।
भारतीय परिवहन शोध और प्रशिक्षण फाउंडेशन के अनुसार देश में कुल माल ढुलाई में ट्रकों का हिस्सा 80.68 प्रतिशत है।
दिसम्बर में जारी रेलवे के विजन 2020 के अनुसार मौजूदा 18,000 किलोमीटर लंबी दोहरी पटरियों को बढ़ाकर 30,000 किलोमीटर करना है। करीब 33,000 किलोमीटर लंबी रेल लाइनों के विद्युतीकरण का लक्ष्य है।
मंत्रालय का मुख्य ध्यान दिल्ली-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई, कोलकाता-मुंबई और दिल्ली-चेन्नई मार्गो पर हैं, जिन पर माल ढुलाई गलियारे का निर्माण होना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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