नौसेना में शामिल किए गए मिग-29के लड़ाकू विमान (लीड-1)
रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी ने चौथी पीढ़ी के इन लड़ाकू विमानों को नौसेना में शामिल किए जाने के लिए आयोजित समारोह में कहा, "नौसेना में मिग-29 विमानों के शामिल हो जाने से इसकी दीर्घकालिक जरूरतें पूरी हो जाती हैं। मुझे विश्वास है कि नौसेना की क्षमताओं को बढ़ाने में ये विमान मील का पत्थर साबित होंगे।" नौसेना में अभी इस श्रेणी के 12 और विमान शामिल किए जाएंगे।
एंटनी ने कहा, "विलंब के बावजूद इस परियोजना को पूरा करने के लिए मैं विमान उत्पादक कंपनी, आरएसी मिग को बधाई देना चाहूंगा। नौसेना अपनी निर्धारित सीमाओं के अंदर इन विमानों की उड़ान शुरू करेगा, चालक दल को प्रशिक्षित करेगा, अपने सिद्धांत निर्धारित करेगा और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य के जलावतरण के साथ ही ये विमान अभियान के लिए तैयार हो जाएंगे।"
नौसेना प्रमुख एडमिरल निर्मल वर्मा ने कहा कि मिग-29 से नौसेना की सामरिक क्षमता में बढ़ोतरी होगी।
वर्मा ने कहा, "हम समुद्र में अपनी रणनीतियों को नए सिरे से आकार दे रहे हैं और नौसेना की भूमिका का विस्तार कर रहे हैं।"
आईएनएस हंस के कमान अधिकारी कैप्टन सुरेंद्र अहूजा ने कहा कि इन लड़ाकू विमानों से नौसेना की हवाई आक्रामक क्षमता काफी हद तक बढ़ जाएगी। फिलहाल मिग-29 विमान आईएनएस हंस से ही संचालित हो रहे हैं।
अहूजा ने आईएनएस से कहा, "हमारी हवाई समरिक क्षमता में 60-70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाएगी।"
अभी तक नौसेना के पास 'सी हैरियर' लड़ाकू विमान हैं, जो एकमात्र विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत से उड़ान भरते हैं। वर्ष 1980 में खरीदे गए इन विमानों में से केवल 11 विमान फिलहाल सेवा में हैं। इनमें से आठ विमान सामरिक उद्देश्यों के लिए हैं और तीन का इस्तेमाल प्रशिक्षण कार्यो में किया जाता है।
नौसेना ने रूस से मिग-29 श्रेणी के 16 विमानों के लिए पहले से अनुबंध कर रखा है। लेकिन रक्षा मंत्री एंटनी ने शुक्रवार को घोषणा की कि इस श्रेणी के 29 और विमान खरीदे जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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