आईआईटी प्रवेश परीक्षा 2013 से हो सकती है खत्म (लीड-2)
देश भर के कम से कम 20 स्कूली शिक्षा बोर्डो के सदस्यों के साथ बैठक के बाद केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा, "वर्ष 2013 तक देश के पेशेवर संस्थाओं में प्रवेश के लिए हमारे पास एक प्रणाली होगी।"
इस बारे में मंत्रालय के संयुक्त सचिव एस. सी. खुंतिया ने कहा, "हर विधा के लिए हम एक समान प्रवेश परीक्षा आयोजित करने पर काम करेंगे। सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए एक परीक्षा होगी जिसमें आईआईटी भी शामिल होगा।"
खुंतिया ने कहा कि इस तरह आईआईटी के लिए अलग से प्रवेश परीक्षा का आयोजन नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस दिशा में अभी काम किया जाना है।
उन्होंने कहा, "प्रवेश परीक्षा के अंकों के आधार पर छात्रों का चयन किया जाएगा। आप कह सकते हैं कि ज्यादा अंक प्राप्त करने वाले छात्र आईआईटी में प्रवेश पा सकते हैं, उससे कम अंक प्राप्त करने वाले छात्र द्वितीय दर्जे के इंजीनियरिंग कॉलेजों में नामांकन हासिल कर सकते हैं।"
उन्होंने यह भी कहा कि सहमति कायम होने पर शिक्षा सत्र 2011 से देश के सभी स्कूली बोर्डो में 11वीं और 12वीं में गणित और विज्ञान का समान पाठ्यक्रम लागू किया जा सकता है। इससे राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में छात्रों के लिए प्रतिस्पर्धा का स्तर एक समान हो सकेगा।
सिब्बल ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सभी छात्रों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। अगले साल से विज्ञान और गणित के समान पाठ्यक्रमों को देश के सभी स्कूली बोर्डो में लागू किया जा सकता है।
सिब्बल ने विभिन्न राज्यों के स्कूली शिक्षा बोर्डो के कम से कम 20 सदस्यों के साथ बैठक करके विज्ञान विषयों के पाठ्यक्रम पर चर्चा की।
इस कदम का स्वागत करते हुए बिहार स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष ए. के. पी. यादव ने आईएएनएस से कहा कि इससे देश भर के छात्रों को एक जैसा पाठ्यक्रम पढ़ने का मौका मिलेगा। साथ ही आईआईटी व मेडिकल जैसी प्रवेश परीक्षाओं में छात्रों के लिए प्रतिस्पर्धा का स्तर एकसमान होगा।
स्कूलों के लिए समान पाठ्यक्रम बनाने के लिए सिब्बल पिछले पांच महीनों से स्कूली शिक्षा बोर्डो के संपर्क में हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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