कम उम्र में मिली प्रताड़ना का होता है गहरा असर
वाशिंगटन, 6 फरवरी (आईएएनएस)। एक नए अध्ययन के मुताबिक जिन बच्चों को कम उम्र में प्रताड़ित किया जाता है उनके बाद के जीवन में इस प्रताड़ना का गहरा असर देखा जाता है।
जिन बच्चों के प्रति बुरा व्यवहार किया जाता है या उन्हें शारीरिक, यौन संबंधी या भावनात्मक प्रताड़ना दी जाती है या उनकी उपेक्षा की जाती है तो वे तनाव के साथ बड़े होते हैं।
कॉर्टिसोल हार्मोन या तनाव हार्मोन शरीर में तनाव को नियंत्रित करने में मदद करता है लेकिन जब तनाव पुराना हो जाता है या बढ़ने लगता है तो कोर्टिसोल का स्तर भी घटने या बढ़ने लगता है जिससे विकास रुकता है और स्वास्थ्य गिरने लगता है।
युनीवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा (यू-एम) के प्रोफेसर व अध्ययकर्ता डैंट किक्चेटी कहते हैं, "अमेरिका में हर साल 15 लाख से अधिक बच्चों के साथ प्रताड़ना और तिरस्कार भरा का व्यवहार किया जाता है यद्यपि अनुमान यह है कि ऐसे बच्चों की वास्तविक संख्या और अधिक होगी।"
मिनेसोटा और रोचेस्टर युनीवर्सिटी व माउंट होप फेमिली सेंटर ने सात से 13 वर्ष उम्र के 500 बच्चों पर यह अध्ययन किया। ये सभी बच्चे कम तनख्वाह पाने वाले परिवारों से थे।
इनमें से करीब आधे बच्चे प्रताड़ना या तिरस्कार के शिकार थे। अध्ययनकर्ता जानना चाहते थे कि बचपन में दी गई प्रताड़ना और अवसाद उनमें कोर्टिसोल के स्तर को किस तरह प्रभावित करता है।
अध्ययकर्ताओं ने पाया कि अपने जीवन के शुरुआती पांच वर्षों में प्रताड़ित होने वाले बच्चों में अवसाद का स्तर जीवन के शुरूआती वर्षो में या जीवन में कभी भी प्रताड़ित न होने वाले बच्चों की तुलना में अधिक था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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