मप्र में उपार्जित गेहूं प्रदेश को ही आवंटित किया जाए : चौहान

चौहान शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री डॉ़ मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में महंगाई पर आयोजित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे।

चौहान ने बताया कि प्रदेश में कालाबाजारियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की गई है। 17 करोड़ रुपये मूल्य की 56 हजार क्विंटल शक्कर जब्त की गई है। सरकार गेंहूं, चावल और कैरोसिन के जमाखोरों के खिलाफ कड़ी और प्रभावी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।

चौहान ने पूरे देश में महंगाई होने के लिए केन्द्र की नीतियों को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार सहयोग के लिए तैयार है। महंगाई पर नियंत्रण करने के लिए मुख्य भूमिका केन्द्र सरकार की ही होती है।

राज्य सरकार द्वारा मंहगाई को नियंत्रित करने के लिए प्रदेश में उपभोक्ताओं को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक माह की एक तारीख के पूर्व स्टॉक पहुंचा दिया जाता है। राशन की दुकानें प्रतिदिन खुली रखने का निर्णय लिया गया है। दुकानों के निरीक्षण का अधिकार जनता को दिया गया है। बायोमैट्रिक डाटा डिजिटलाइजेशन आधारित फूड कूपन वितरण व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है। अगले वित्त वर्ष से यह व्यवस्था लागू हो जायेगी।

मध्यप्रदेश सरकार ने 50 हजार मीट्रिक टन शक्कर का आयात कर इसे 27 रुपये 50 पैसे प्रतिकिलो की दर से उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवायी जा रही है। ओपन मार्केट सेल्स स्कीम में 9 हजार टन गेंहूं उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। अन्त्योदय अन्न योजना, गरीबी रेखा से नीचे बीपीएल योजना और एपीएल गेहूं का उठाव भी शत-प्रतिशत है।

मुख्यमंत्री चौहान ने प्रधानमंत्री का ध्यान बाण सागर सिंचाई परियोजना की ओर आकर्षित करते हुए बताया कि बांध कई वषरें से तैयार है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से वन भूमि से नहर बनाने की अनुमति नहीं दिये जाने के कारण हजारों एकड़ जमीन की सिंचाई नहीं हो पा रही है जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

चौहान ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि मध्यप्रदेश से खनन किये जाने वाला कोयला मध्यप्रदेश को दिया जाय। बन्दरगाह नहीं होने के कारण कोयला आयात करना मध्यप्रदेश के लिए अत्यन्त महंगा होगा जिससे बिजली भी मंहगी होगी। बिजली की उपलब्धता कम होने से सिंचाई का क्षेत्र घटने से कृषि उत्पादन भी घटेगा।

चौहान ने प्रधानमंत्री को बताया कि प्रदेश में गेंहू की खरीदी पर केन्द्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त बोनस दिया जा रहा है। इससे पिछले दो वषरें में प्रदेश में आवश्यकता के अनुरूप गेहूं का उपार्जन किया गया है। चौहान ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि ओपन मार्केट सेल स्कीम में मध्यप्रदेश को प्रदेश से ही उत्पादित गेंहू भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से प्रदाय किया जाय।

चौहान ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2009 में आवंटित शक्कर के विरुद्घ 55 हजार मीट्रिक टन शक्कर कम दी गई है। यह मात्रा 6 माह के वर्तमान आवंटन के बराबर है। अत: 55 हजार मीट्रिक टन शक्कर शीघ्र जारी की जाय। इसी प्रकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत शक्कर का आवंटन साढ़े 12 हजार मीट्रिक टन से 25 प्रतिशत घटाकर 9 हजार मीट्रिक टन कर दिया गया है। इसे पूर्ववत किया जाय।

खाद्यान्न से एथेनाल और अल्कोहल बनाकर ईंधन में उसका उपयोग किये जाने को प्रतिबंधित किया जाय। प्रदेश की भूमि खाद्य उत्पादन के लिए अच्छी किस्म की है। इसलिए सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण के लिए भारत सरकार द्वारा अधिक राशि दी जाना चाहिए। इससे देश में दीर्घ अवधि में खाद्यान्न की कमी को दूर किया जा सकेगा। नर्मदा बेसन से गंगा बेसिन तक नर्मदा नदी का पानी ले जाने के कार्य को नेशनल प्रेाजेक्ट के रूप में हाथ में लिया जाए।

चौहान ने प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित किया कि कृषि योग्य भूमि अब केवल खेती के लिए सुरक्षित रखी जाय। यह भी सुनिश्चित किया जाय कि कृषि भूमि किसी भी स्थिति में कम नहीं हो।

चौहान ने बताया कि प्रदेश में मंहगाई को नियंत्रित रखने के लिए अनेक कदम उठाये गये हैं। कुकिंग गैस से प्रदेश में प्रवेश कर कम किया गया है किन्तु टैक्स का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिला। इस टैक्स का लाभ आयल कंपनियों ने उपभोक्ताओं को नहीं दिया। केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों द्वारा विरोधाभाषी निर्देश जारी किये जाने से भी मंहगाई बढ़ती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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