मप्र में बिजली खरीद में 3,000 करोड़ रुपये की दलाली का आरोप

चौधरी ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि हाल ही में मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए राकेश साहनी अपने कार्यकाल में तीन महत्वपूर्ण विभागों के अध्यक्ष रहे। साहनी ने ऊर्जा विभाग की कंपनियों के अध्यक्ष रहते हुए बिना निविदा के 750 करोड़ रुपये की बिजली खरीदी। इसकी शिकायत लोकायुक्त से हुई और राज्य ऊर्जा नियामक आयोग ने भी इस पर आपत्ति जताई। चौधरी का आरोप है कि नियामक आयोग के अध्यक्ष जे.एल. बोस ने सेवानिवृत्त होने से कुछ दिन पहले कार्यादेश की स्वीकृति देकर बिना निविदा के खरीद को जायज ठहरा दिया।

उन्होंने कहा कि एनटीपीसी सहित विभिन्न संस्थाएं सीधे सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराने को तैयार हैं मगर प्रदेश में दलालों के माध्यम से बिजली खरीदी गई। इस खरीदी में 3000 करोड़ रुपये दलाली में दे दिए गए।

चौधरी ने कहा कि प्रदेश में उर्जा मंत्री तो राज्य मंत्री के दर्जे का है परंतु विवादों में घिरे रहे मुख्य सचिव साहनी को विद्युत मंडल का अध्यक्ष बनाकर उन्हें कैबिनेट का दर्जा दे दिया गया है। प्रदेश में पहली दफा ऐसा हुआ है। उन्होंने कहा कि अब सवाल उठता है कि बड़ा कौन है।

चौधरी का आरोप है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ही भ्रष्टाचार में लिप्त अफसरों से घिरे हुए हैं। दो भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के यहां करोड़ों रुपये की संपत्ति मिलने से इस बात का खुलासा हुआ है। उन्होंने दोनों अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मंत्री, अफसर और ठेकेदारों की तिकड़ी बन गई है जो प्रदेश की योजनाओं के लिए आवंटित राशि का बंदरबांट कर रही है।

चौधरी ने कहा है कि प्रदेश के मंत्री से लेकर अफसर तक अपनी संपत्ति का खुलासा करने से कतराते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मंत्री और आईएएस अफसरों की संपत्ति की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में समिति बनाई जाए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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