अमेरिकन सेंटर के हमलावरों की मौत की सजा बरकरार (लीड-1)
न्यायमूर्ति असीम बनर्जी और न्यायमूर्ति कालीदास मुखर्जी की खंडपीठ ने शुक्रवार को अंसारी और नसीर को मौत की सजा बरकारा रखने संबंधी निर्णय दिया। इस मामले की सुनवाई 77 दिनों तक चली।
निचली अदालत ने अंसारी और नसीर को मौत की सजा सुनाई थी। अंसारी, नसीर और पांच अन्य दोषियों ने अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में अपील की थी।
उच्च न्यायालय ने जहां अंसारी और नसीर की मौत की सजा बरकार रखी वहीं हसरत आलम, सकीब अख्तर और बॉबी को उम्र कैद की सजा सुनाई। दूसरी ओर साक्ष्य के अभाव में रेहान आलम ऊर्फ मोंटी और आदिल हुसैन को रिहा कर दिया गया।
सरकारी वकील अनिमेश गोस्वामी ने अंसारी, नसीर, अख्तर, आलम और बॉबी की मौत की सजा बरकरार रखने की अपील की थी। उन्होंने दो अन्यों के मामले में फैसला न्यायालय के विवेक पर छोड़ दिया था, क्योंकि दोनों के खिलाफ साक्ष्य का अभाव था।
उधर, सातों दोषियों के वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं और उन्हें फंसाया गया है।
उल्लेखनीय है कि कोलकाता स्थित अमेरिकन सेंटर में 22 जनवरी 2002 को हुए आतंकवादी हमले में छह पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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