दिग्विजय ने भरोसा दिलाया न्याय दिलाने का

रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में संजरपुर गाँव के उन परिवारों को न्याय और राहत दिलाने का भरोसा दिलाया है जिनके बच्चे संदिग्ध चरमपंथी गतिविधियों में शामिल होने के कारण गिरफ़्तार किए गए हैं या फिर मुठभेड़ में मारे गए थे.
दिग्विजय सिंह ने बुधवार को आज़मगढ़ का दौरा किया.
संजरपुर विशेष तौर पर दिल्ली में सितंबर 2008 के बटाला हाउस मुठभेड़ के बाद चर्चा में आया था.
उस मुठभेड़ में दो युवा मारे गए थे और दो गिरफ़्तार हुए थे. दिल्ली पुलिस ने इन पर दिल्ली में हुए धमाकों में शामिल होने का आरोप लगाया है.
संजरपुर के अलावा आज़मगढ़ के कुछ अन्य गाँवों के लडके भी गुजरात, दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कथित चरमपंथी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ़्तार किए गए हैं.
आज़मगढ़ निवासियों में रोष
इन हालात में मीडिया में अनेक जगहों पर आज़मगढ़ को ‘चरमपंथ की नर्सरी’ की संज्ञा दी गई है. लेकिन आज़मगढ़ के मुस्लिम समुदाय में इस बारे में ख़ासा गुस्सा है.
अनेक आज़मगढ़ निवासी आरोप लगाते हैं कि पुलिस ने जानबूझकर ऐसे निर्दोष लड़कों को फंसाया है जो उच्च शिक्षा और रोज़गार के लिए दिल्ली और दूसरे बड़े शहरों में पहुँचे थे.
ये लोग लंबे समय से पूरे मामले की न्यायिक जांच की माँग करते रहे हैं लेकिन सरकार और अदालत ने भी इसे अस्वीकार कर दिया है.
मुस्लिम समुदाय को विशेष तौर पर कांग्रेस पार्टी से शिकायत है जिसके नेतृत्व में केंद्र में सरकार चल रही है.
पिछले लोकसभा चुनाव में इसी मुद्दे पर दो क्षेत्रीय राजनीतिक दलों - उलेमा काउंसिल और पीस पार्टी का गठन हुआ था.
रीता जोशी रो पड़ीं
उलेमा काउंसिल ने दिग्विजय सिंह के दौरे का विरोध किया लेकिन संजरपुर गाँव के लोगों ने गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया.
दिग्विजय सिंह के अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव और वाराणासी की ज्ञानवापी मस्जिद के मुफ़्ती मौलाना अब्दुल बातिन लगभग डेढ़ घंटे तक गाँव में रहे.
वहाँ आसपास के गाँवों से लगभग 1500 लोग जमा थे. पीड़ित परिवारों की महिलाओं से बात करते हुए रीता जोशी ख़ुद रो पड़ीं.
संजरपुर निवासी मोहम्मद सादाब के अनुसार, "दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तक उनकी बात पहुँचाने और न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया है."
मोहम्मद सादाब का कहना था, "हम केवल अपने बच्चों की रिहाई चाहते हैं."
दिग्विजय सिंह का कहना था, "हम राजनीति करने नहीं बल्कि सच्चाई जानने के लिए आए हैं."
लेकिन टीकाकारों का कहना था कि ये उत्तर प्रदेश में मुसलमानों को लुभाने के लिए कांग्रेस की सोची समझी कोशिश है.












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