दिग्विजय सिंह ने बाटला हाउस मुठभेड़ पर उठाए सवाल
दोपहर बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी के साथ आजमगढ़ की सीमा में प्रवेश करते ही उलेमा काउंसिल के कार्यकर्ताओं ने दिग्विजय सिंह को काला झ्झंडा दिखाया और कांग्रेस विरोधी नारे लगाए। दिग्विजय सीधे संजरपुर गांव पहुंचे जहां उन्होंने करीब डेढ़ घंटे तक उन परिवारों से बातचीत की जिनके घर के युवा दहशतगर्दी में आरोपित हैं।
बाटला हाउस में मारे गए आतिफ के परिवार ने सिंह से मिलने से इंकार करते हुए कहा कि वे तभी मिलेंगे जब इस मामले की न्यायिक जांच कराई जाएगी। परिवारों से मिलने के बाद गांव की चौपाल में उन्होंने कहा कि बाटला हाउस कांड पर उन्हें अफसोस है, जिसमें आजमगढ़ के दो युवा लड़के मारे गए और इंस्पेक्टर की भी मौत हुई।
बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद मारे गये दो युवकों के फोटोग्राफ देखे हैं, जिसमें एक लड़के की सिर में गोली लगी थी। आमतौर पर मुठभेड़ के दौरान सिर में गोली नहीं लगती है। मुठभेड़ में सामने से गोली चलेगी तो पेट या सीने में लगेगी न कि सिर पर।
सिंह ने कहा कि इस मामले को मानवाधिकार आयोग को सौंपा गया था लेकिन जिन लोगों ने शिकायत की, उन लोगों को आयोग ने नहीं बुलाया। उन्होंने संजरपुर के लोगों से बाटला हाउस की न्यायायिक जांच कराने की बात न कहकर यह आश्वासन दिया कि संजरपुर के युवकों को न्याय मिलेगा।
उलेमा काउंसिल द्वारा उनके आजमगढ़ दौरे को कांग्रेस की एक छद्म राजनीति का हिस्सा करार देने पर दिग्विजय ने कहा कि उनका दौरा राजनीति से प्रेरित नहीं है। सिंह ने कहा कि यहां वह राजनीति करने नहीं बल्कि गंगा जमुनी तहजीब को बचाने आये हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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