बच्चों की किताबों में बरकरार है दिलचस्पी
नई दिल्ली, 3 फरवरी (आईएएनएस)। क्या आप ऐसा सोचते हैं कि बच्चे जैसे पहले किताबें पढ़ा करते थे वैसी किताबें अब वे नहीं पढ़ते? लेकिन प्रकाशन उद्योग ऐसा नहीं सोच रहा है। उनका कहना है कि मंदी के बावजूद भी बच्चों के किताबों की बिक्री में इजाफा हुआ है और मुनाफा भी बढ़ा है।
'स्कॉलस्टिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' के शांतनुदास गुप्ता ने बताया, "यह गलतफहमी है कि आजकल बच्चों की किताबों में दिलचस्पी खत्म हो रही है। अगर यह सही होता तो हम हर साल की तरह इस साल भी इतनी किताबें प्रकाशित नहीं करते। पिछले साल मंदी होने के बावजूद हम मुनाफे में रहे।"
नई दिल्ली में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में किताबों को सहेजते हुए दासगुप्ता ने आईएएनएस को बताया, "हम प्रत्येक वर्ष करीब 80 नई किताबें प्रकाशित करते हैं। भारत में हर साल कुल मिलाकर 1,500-2,000 किताबें बच्चों के लिए छपती हैं। भारत में बच्चों की किताबों का कारोबार बढ़ रहा है।
ग्वालियर से आए राजेश कुमार भगत ने बताया कि बच्चों के किताबों की मांग बढ़ रही है। हम प्रत्येक साल बच्चों के लिए 20 से ज्यादा शैक्षिक किताबें प्रकाशित करते हैं।
गौरतलब है कि नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) के एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई थी कि कंप्यूटर और वीडियो गेम के आने की वजह से ज्यादातर युवा उसके आदी हो गए हैं। लिहाजा बच्चों में किताबें पढ़ने का शौक नहीं रहा है।
एनबीटी के अध्यक्ष बिपिन चंद्रा ने बताया, "हम एक राष्ट्रीय पाठक सर्वेक्षण करा रहे हैं कि क्या वास्तव में आजकल बच्चों में पढ़ने की दिलचस्पी कम हो रही है। अगर नहीं तो प्रकाशन उद्योग कैसे उनकी जरूरतों को पूरा कर पाएगा।"
चंद्रा ने बताया," मैं ऐसा नहीं मानता कि बच्चे किताब नहीं पढ़ते हैं। हम देख रहे कि पिछले कुछ सालों में हमारे पाठक क्लब में पंजीकरण कराने वालों की तादाद बढ़ी है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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