चंडीगढ़ की एड्स पीड़ित पूजा बनी प्रेरणास्रोत
अल्केश शर्मा
चण्डीगढ़, 27 जनवरी (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के धरमपुर में एक गरीब परिवार के घर जन्मी पूजा ठाकुर खुद एड्स से पीड़ित हैं लेकिन आज वह पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के एड्स पीड़ितों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन चुकी है। वह एड्स पीड़ितों के कल्याण में दिन-रात जुटी रहती हैं। उनके इसी जज्बे को सलाम करते हुए सरकार ने गणतंत्र दिवस के मौके पर उन्हें राजकीय पुरस्कार से सम्मानित किया।
पूजा स्कूल की पढ़ाई भी पूरी नहीं कर सकी थी कि घर वालों ने चंडीगढ़ में एक ट्रक ड्राइवर से उसकी शादी कर दी। कुछ सालों बाद एड्स पीड़ित पति से सौगात में उसे भी एड्स की यह लाइलाज बीमारी मिली। पति की मौत के बाद घर से निकाले जाने के बाद रोजी-रोटी कमाने के लिए वह चंडीगढ़ के एड्स पीड़ितों को हक दिलाने वाली एक संस्था से जुड़ी और आज यही संस्था उसके जीवन का सबसे प्रमुख हिस्सा बन गई है।
वह पिछले चार वर्षो से एड्स पीड़ितों के हक की लड़ाई लड़ रही है। वह अस्पतालों में उनके इलाज में न सिर्फ सहयोग करती है बल्कि उनकी दैनिक जरूरतों को भी पूरा करती है। साथ ही वह अपने परिवार की भी देखभाल करती हैं।
अपने पति की मौत के बाद वह वर्ष 2005 में एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) 'चण्डीगढ़ नेटवर्क ऑफ पीपुल लिविंग विथ एचआईवी/एड्स' से बतौर एक कार्यकर्ता जुड़ी थी। इस संस्था से वह केवल आजीविका के लिए जुड़ी थी लेकिन आज यह पेशा उसके दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
ठाकुर ने बुधवार को आईएएनएस को बताया, "हमारे एनजीओ में 700 सदस्य हैं जिनमें से 400 तो चण्डीगढ़ से ही हैं। चण्डीगढ़ के अलावा पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी हम एड्स से पीड़ित 1,000 मरीजों के पास पहुंच रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "चंडीगढ़ में हम एड्स पीड़ितों को कभी-कभार समस्याओं का सामना करना पड़ता है लेकिन पंजाब व हरियाणा में स्थिति और भी गंभीर है। मरीजों का ठीक ढंग से अस्पताल में इलाज तक नहीं होता है। लोगों को जब हमारी बीमारी का पता चलता है तो वह हमसे दूरी बनाने लगते हैं। लोग हमसे खौफ खाने लगत हैं और हमें अपमानित करते हैं।"
पूजा कहती हैं, "अब मेरे जीव का एकमात्र उद्देश्य एड्स पीड़ितों के लिए काम करना रह गया है। इसी से मुझे ऊर्जा और जीने का मकसद मिलता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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