मैं भयभीत नहीं : फोंसेका
कोलंबो, 27 जनवरी (आईएएनएस)। श्रीलंका में मंगलवार को संपन्न राष्ट्रपति पद के चुनाव के मुख्य प्रत्याशी एवं पूर्व सेना प्रमुख जनरल सरथ फोंसेका ने हथियारबंद सैनिकों द्वारा उनके होटल के चारों ओर कड़ा घेरा बना लेने के बाद बुधवार को कहा, "मैं भयभीत नहीं हूं।"
फोंसेका ने समाचार चैनल एक्स को बताया, "श्रीलंका सरकार की योजना मेरे आवास, मेरे कार्यालय, ब्राडकास्टिंग कारपोरेशन, राष्ट्रीय टेलीविजन केंद्र के इर्द-गिर्द सैनिकों को तैनात करने की है और अगर वह (राजपक्षे) हार गए, तो उन्होंने सेना के कमांडरों और सुरक्षा परिषद को मुझे हिरासत में लेने का आदेश जारी कर रखा है।..वह सत्ता की बागडोर मुझे नहीं सौंपेंगे।"
फोंसेका ने कहा, "..वे पहले से घेराबंदी कर चुके हैं।..यह उसी ऑपरेशन का हिस्सा है..इसीलिए हम अपना मकान और दफ्तर छोड़कर यहां आ चले आए..और सभी विपक्षी नेता..वे मेरे सुरक्षा कर्मियों को धमका रहे हैं और तो और उन्होंने होटल में भी दाखिल होने की कोशिश की, हम उन्हें बाहर खदेड़ने में कामयाब रहे।.."
श्रीलंका में 26 साल के खूनी संघर्ष में तमिल विद्रोहियों का सफाया करने के बाद हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव में फोंसेका का समर्थन राजपक्षे के विपक्षी गठबंधन ने किया।
फोंसेका ने चैनल को बताया, "..वे चाहते हैं कि सेना के कमांडर मुझे गिरफ्तार कर लें और वायु सेना के कमांडर से कह दिया गया है कि वह हवाई अड्डे पर कब्जा कर ले..वे पहले ही सभी प्रसारण और टेलीविजन केंद्रों पर सेना भेज चुके हैं।..वे सभी लोगों को पहले ही छुट्टी पर भेज चुके हैं, उनके पास केवल कुछ लोग और सेना है..तो यह फौजी बगावत के संकेत हैं।..वह चुनाव हारने पर सत्ता में बने रहना चाहते हैं।"
अपनी हत्या की आशंका पर टिप्पणी करते हुए फोंसेका ने कहा, "मैं भयभीत नहीं हूं, लेकिन मुझे पता है कि यह उनकी योजना है।..हम मुकाबला करेंगे।"
सैनिकों द्वारा घेराबंदी किए जाने पर फोंसेका ने कहा, "यह बेहद घृणित है। राष्ट्रपति अभद्र व्यवहार कर रहे हैं, कानून एवं व्यवस्था का उल्लंघन कर रहे हैं, संविधान का उल्लंघन कर रहे हैं। वह इस पद पर बने रहने के लायक नहीं रह गए हैं।"
फोंसेका को उम्मीद है कि सेना उनका समर्थन करेगी। उन्होंने कहा, "सेना इसे स्वीकार नहीं करेगी।..वह इसे प्रोत्साहन नहीं देगी। नैतिक तौर पर सैनिक मेरे साथ हैं। वे सेना में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यदि उन्हें कानूनी आदेश मिलेंगे, सेना प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त करेगी।..लेकिन कुछ उपद्रवी तत्व..जो लोग बाहर हैं, वह दखलंदाजी की कोशिश करेंगे, न कि पूरी सेना।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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