हिमाचल की 3000 करोड़ रुपये की वार्षिक योजना प्रस्तावित
सांसदों एवं विधायकों के बहुमूल्य सुझावों का स्वागत करते हुए प्रो़ धूमल ने राज्य के त्वरित, समान एवं संतुलित विकास की अपनी सरकार की प्रतिबद्घता को दोहराते हुए कहा कि प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010-2011 में पिछड़ा क्षेत्र उप योजना के अन्तर्गत 63 करोड़ रुपए का प्रस्ताव किया गया है जबकि वर्ष 2009-2010 में इसके तहत 57 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे।
मुख्यमंत्री ने पिछड़ा क्षेत्र उपयोजना के तहत नियमों के पुनर्निर्धारण पर बल देते हुए कहा कि राज्य के अधिकांश पिछड़े क्षेत्र उन विकास मानकों से आगे निकल चुके हैं, जो पिछड़ा क्षेत्र उपयोजना के तहत निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने सांसदों एवं विधायकों से आग्रह किया कि वे भी इस संबंध में सुझाव दें ताकि इस दिशा में और कदम उठाए जा सकें।
प्रो़ धूमल ने कहा कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने में तेजी लाने के लिए निर्णय लिया गया है कि वर्ष 2010-11 में विधायकों द्वारा 6 नई योजनाएं प्रस्तावित की जाएं। प्रत्येक योजना की अधिकतम सीमा को तीन करोड़ रुपये से पांच करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया गया है और अब प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में प्रत्येक वर्ष 30 करोड़ रुपये की योजनाएं स्वीकृत की जा सकती हैं, जबकि पहले यह सीमा 27 करोड़ रुपए तक थी। इससे राज्य के प्रत्येक क्षेत्र में विकास की गति को बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नाबार्ड के तहत वर्ष 2008-2009 में निर्धारित की गई विधायकों की 406 करोड़ रुपये की प्राथमिकताओं के लक्ष्य की तुलना में 425 करोड़ रुपये की योजनाएं स्वीकृत की गई। वर्तमान वित्तीय वर्ष में नाबार्ड के तहत 454 करोड़ रुपए की योजनाओं का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
बेरोजगारी की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रो़ प्रेम कुमार धूमल ने सभी विभागों से कहा कि वे दक्षता विकास की योजनाएं तैयार करें ताकि उद्योग एवं अन्य परियोजनाओं के लिए आवश्यक दक्ष श्रम शक्ति राज्य में उपलब्ध हो सके।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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