सर्द रातों में रैन बसेरा का सहारा

सर्द रातों में रैन बसेरा का सहारा

नारायण बारेठ

बीबीसी संवाददाता, जयपुर

पूरा राजस्थान इस समय कड़ाके की ठंड की चपेट में है. राज्य के ज़्यादातर हिस्सों में लगातार तापमान में गिरावट का दौर जारी है. राजधानी जयपुर में रविवार की रात मौसम की सबसे सर्द रात थी.

यहाँ बेसहारा लोगों को ठंड से बचाने के लिए 18 रैन बसेरे काम कर रहे हैं. इनमें हर रात बड़ी तादाद में लोग पनाह लेते हैं. इनमें कोई मज़दूर है तो कोई हालात का मारा मजबूर. रविवार को जयपुर में रात का पारा 2.7 डिग्री जा पहुँचा. कुछ निजी स्कूलों ने अपने समय में बदलाव किया है तो कुछ ने छु्ट्टी कर दी.

कोहरे में लिपटी सर्द रातों में इन रैन बसेरों की महत्ता बढ़ जाती है. सूरज जैसे दिन को तन्हा छोड़ कर देशाटन पर चला गया है और ठंड के आगे गोया रात के हौसले पस्त हो गए हो.

जब रईस लोग रात को मौज मस्ती के लिए किसी होटल का रुख़ करते हैं, ठंड में ठिठुरी ज़िंदगी इन रैनबसेरों में दाख़िल होती है. ऐसे ही रैन बसेरे में रात बिताने वाले जयपुर ज़िले में विराट नगर के नाथूलाल कहते हैं,"ये ग़रीब के लिए बहुत बड़ा सहारा है. मुझे जैसे ही पता लगा यहाँ चला आया नहीं तो ठंड में मारे-मारे फिरना पड़ता."

आशियाना नहीं

इन रैन बसेरों का संचालन जयपुर नगर निगम के हाथ में है. ये कुछ बड़े अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे स्थानों के नज़दीक खोले गए हैं जहाँ लोगों का आना जाना रहता है.

जयपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के निकट बने रैन बसेरे में हर रोज़ क़रीब 200 लोग रात बिताने आते हैं. उनके लिए यहाँ रजाई है और पास के एक मंदिर का प्रबंधन इनके लिए भोजन भी देता है. रैन बसेरे के कर्मचारी बीएल सोमरा कहते हैं, "रात को यहाँ अनुशासन बना रहता है. महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था है. हां, कभी रात को आवारा शराबी यहाँ घुसने की कोशिश करते हैं."

अपने गाँव से एक परिजन के इलाज के लिए आए अमीचंद कहते हैं,"शनिवार की रात मैंने धर्मशाला में शरण ली. वहाँ इंतजाम ठीक नहीं था. ग़रीब के लिए महंगा भी था. सो मैं इस रैन बसेरा में आ गया."

इन बसेरों में पनाह वो लोग लेते हैं जिनके जिस्म पर लिबास नहीं होता और जिस्म भी कमज़ोर होता है. दुर्गा लाल सीकर से मज़दूरी करने जयपुर आए और रात काटने रैन बसेरे में चले आए. वो कहते हैं,"ये नहीं हो तो लोग ठंड में खुले में ही दम तोड़ दे."

संपन्न लोग दुनिया से जब रुख़स्त करते हैं तो कहा जाता है कि वे ब्रह्मलीन हो गए उन्हें जन्नत नसीब हो गई. वो मरने के बाद भी आलिशान मकबरों में रहते हैं. वहीं एक दुनिया ये भी है जहाँ लोगों को सिर छिपाने के लिए आशियाना नसीब नहीं होता.

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