गडकरी की नियुक्ति में संघ का हाथ नहीं: भागवत

लखनऊ के सरस्वती शिशु मंदिर में रविवार को एक सार्वजनिक भाषण में भागवत ने गडकरी का नाम लिए बगैर कहा कि हाल ही में इस तरह की खबरें आई थी कि संघ ने उनको राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, "हम न तो राजनीति में शामिल होते हैं और न ही हम महत्वपूर्ण पदों पर लोगों को बिठाते हैं। "
भाजपा के अंदरूनी मामलों में नहीं पड़ते
भागवत ने कहा, "हमने उन्हें कोई पद नहीं दिया है। क्योंकि यह उनका अंदरुनी मामला है। इससे हमारा कोई लेना देना नहीं है। यहां तक कि राजनीति करना संघ की परम्पराओं के विपरीत है। मीडिया में ऐसी खबरें आ रही है कि हमने उन्हें पद दिलाने में महत्वपूर्ण निभाई है।"
उन्होंने कहा कि कई स्वयंसेवकों ने राजनीति का दामन थामा है लेकिन यह व्यक्तिगत फैसला होता है। उन्होंने कहा कि संघ कोई राजनीतिक संगठन नहीं है। "संघ एक सांस्कृतिक संगठन है। वास्त्व में हम राजनीति में यकीन नहीं रखते क्योंकि इससे समाज विभाजित होता है लेकिन हम राष्ट्र नीति में भरोसा करते करते हैं। राष्ट्रीय एकता के लिए हम यह करना जारी रखेंगे।"
संघ को लेकर कई भ्रांतियां हैं
भागवत ने कहा कि संघ को लेकर लोगों के मन में तरह-तरह की भ्रांतियां विद्यमान है। ऐसे लोगों से हमारा आग्रह है कि वे संघ से आकर जुड़े, इसे समझ और नजदीक से आकर स्वयंसेवकों के काम को देखें। छह महीने से एक साल के अनुभव के बाद ही वह संघ के बारे में कोई राय बनाए।
स्वयंसेवकों द्वारा शहर में उनके स्वागत में लगाए गए होर्डिंगों पर नाराजगी जताते हुए भागवत ने कहा, "मुझ्झे आज ये समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला। ये सब संघ की परंपरा और आदर्शो के खिलाफ है।" आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर लगातार हो रहे नस्लीय हमलों की निंदा करते हुए भागवत ने केंद्र सरकार से कहा कि आस्ट्रेलिया सहित दुनिया के दूसरे देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए वह ठोस कदम उठाए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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