'पक्षियों के लिए खतरा है गुजरात का पतंग महोत्सव'

इस महोत्सव में लाखों की संख्या पतंगें आसामान में होती हैं और नुकीली पतंगों की चपेट में आने से सैकड़ों की संख्या में पक्षी घायल हो जाते हैं या फिर मर जाते हैं।

गैर सरकारी संगठनों का कहना है कि इस महोत्सव के दौरान 1,500 से अधिक पक्षी घायल होते हैं लेकिन इनमें से कुछ ही दोबारा उड़ने में सक्षम हो पाते हैं। अपंग पक्षियों को आजीवन देखभाल केंद्रों पर रहना पड़ता है।

वन विभाग और गैर सरकारी संगठनों ने पक्षियों के लिए दर्जनों देखभाल केंद्र खोले हैं जिसके जरिए घायल पक्षियों की मदद की जाती है। वन विभाग 10 से 17 जनवरी तक पांच राहत केंद्रों का संचालन करता है।

'जीव दया ट्रस्ट' के कार्तिक शास्त्री ने आईएएनएस को बताया, "बीते साल गैर सरकारी संगठनों ने वन विभाग के साथ मिलकर एक सार्वजनिक राहत केंद्र का संचालन किया था। इस साल सरकार ने हमें अलग-अलग केंद्र खोलने की इजाजत दी है।"

शास्त्री ने कहा कि पिछले साल 25 जातियों के पक्षी इस महोत्सव से प्रभावित हुए थे। इनमें बुलबुल, कबूतर और चील जैसे पक्षी शामिल थे।

मंडलीय वन अधिकरी वी. जे. परसाना ने कहा कि पिछले साल कम से कम 1,500 पक्षी घायल हुए और इनमें से आधों का ऑपरेशन किया गया। इस काम में कुल 25 चिकित्सकों को लगाया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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