उपेक्षित बुंदेलखण्ड को पहले विकास की दरकार
बुंदेलखंड मित्र परिषद द्वारा बुंदेलखंड राज्य की प्रासांगिकता विषय पर आयोजित परिचर्चा में इस क्षेत्र के दो राज्यों में बंटे होने के कारण संभावित कई समस्याओं के पनपने की खुलकर चर्चा हुई। वरिष्ठ समाजवादी नेता रघु ठाकुर ने कहा कि बुंदेलखंड की हर मामले में उपेक्षा हुई है। इस क्षेत्र की पहली जरूरत विकास की है। जहां तक पृथक राज्य का मसला है, वह किसी हद तक ठंडे बस्ते मे चला गया लगता है। उन्होंने कहा कि इसकी वजह तेलंगाना राज्य के मुद्दे को हवा मिलने के बाद कई राज्यों के गठन की मांग का जोर पकड़ना है।
ठाकुर ने कि अगर अलग राज्य का फैसला हो भी जाता है तो उससे पहले यह तय करना होगा कि किसी भी तरह का खर्च न बढ़ाया जाए। ठाकुर ने छोटे राज्य बनने से विकास होने के तर्क से असहमति जताई।
वरिष्ठ पत्रकार शिव अनुराग पटैरिया ने मत व्यक्त किया कि इस इलाके के विकास के लिए एक ब्लू प्रिंट तैयार किया जाना चाहिए ताकि समस्याओं से छुटकारा मिल सके। कभी बुंदेलखंड की संस्कृति और संपदा का सभी लोहा मानते थे, मगर अब ऐसा नही है, इसकी वजह उपेक्षा है।
पत्रकार दीपक तिवारी ने कहा कि चंद मुट्ठी भर नेता अपने लाभ के लिए पृथकतावादी बातों को प्रचारित करने में लगे हैं। यहां के आम आदमी के नजरिए को जानने की किसी ने कोशिश नहीं की है। राजेंद्र सिलाकारी और भरत तिवारी ने भी अलग राज्य के गठन का विरोध किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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