ईंधन आपूर्ति बहाल होने के बाद भारत का एटमी ऊर्जा उत्पादन बढ़ा
फकीर बालाजी
तिरुवनंतपुरम, 11 जनवरी (आईएएनएस)। पिछले कुछ महीनों में भारत के एटमी ईंधन उत्पादन में 15 फीसदी का इजाफा हुआ है और इसकी वजह है परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह(एनएसजी) के साथ समझौते के बाद भारत को एटमी ईंधन की आपूर्ति बहाल किया जाना। एक शीर्ष वैज्ञानिक ने इसकी पुष्टि की है।
परमाणु ऊर्जा आयोग(एईसी) के पूर्व प्रमुख अनिल काकोदकर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "विदेशी आपूर्तिकर्ताओं की ओर से यूरेनियम की अतिरिक्त आपूर्ति से हमारे परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की क्षमता का विस्तार हुआ है।"
उल्लेखनीय है कि रूस, फ्रांस और कनाडा ने भारत को परमाणु ईंधन की आपूर्ति बहाल कर दी है, जबकि अमेरिका पुराने समझौते के तहत तारापुर स्थित परमाणु संयंत्र के लिए ईंधन मुहैया करा रहा है।
एनएसजी और अमेरिका के साथ समाझौतों के बाद भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता 2020 तक करीब 20,000 मेगावाट हो जाएगी। इसमें देसी तकनीकी से तैयार गुरू जल रिएक्टरों का योगदान 10,000 मेगावाट होगा, जबकि प्लूटोनियम आधारित रिएक्टरों का योगदान 2,000 मेगावाट होगा।
अधिकारियों के मुताबिक शेष करीब 8,000 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन विदेशी कंपनियों द्वारा स्थापित रिएक्टरों से होगा। विदेशी आपूर्तिकर्ताओं ने अतिरिक्त ईंधन मुहैया कराकर देश के 18 परमाणु संयंत्रों की क्षमता में करीब 15 फीसदी का इजाफा कर दिया है।
पहले, ईंधन की कमी के कारण ये संयंत्र औसतन 50-55 फीसदी क्षमता का ही इस्तेमाल कर पाते थे, पर अतिरिक्त ईंधन मिलने के कारण 65-70 फीसदी क्षमता का इस्तेमाल करने लगे हैं।
पिछले सप्ताह यहां भारतीय विज्ञान कांग्रेस के सम्मेलन में भाग लेने आए काकोदकर ने कहा, "जल्द ही राजस्थान परमाणु ऊर्जा संयंत्र अपनी संपूर्ण क्षमता का इस्तेमाल करने लगा है। यह शुभ संकेत है। रूस, फं्रास, कनाडा, अमेरिका और दूसरे देशों की भारतीय एटमी ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती दिलचस्पी देश के लिए बेहतर संकेत है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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