सौर ऊर्जा मिशन को प्राथमिक राष्ट्रीय उद्यम बनाएं : प्रधानमंत्री (लीड-1)
सोलर इंडिया के ब्रांड नाम से जवाहरलाल नेहरु राष्ट्रीय सौर मिशन का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना में इस मिशन का गौरवपूर्ण स्थान है। इसकी सफलता में भारतीय ऊर्जा परिदृश्य को बदलने की क्षमता है और जलवायु परिवर्तन से निपटने के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों में भी इसका योगदान है।
मनमोहन सिंह ने अक्षय ऊर्जा मिशन को अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे वर्तमान जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता समाप्त होगी और अक्षय तथा स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर आधारित स्थाई विकास का ढांचा विकसित होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह भारत को न केवल सौर ऊर्जा उत्पादन वरन सौर उपकरणों के निर्माता और उसकी प्रौद्योगिकी के विकासकर्ता के रूप में स्थापित करेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मिशन का महत्व 'बड़े पैमाने पर ग्रिड आधारित ऊर्जा' उपलब्ध कराने से आगे बढ़ना है। इसमें ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था में बदलाव के प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता है।
उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा इस मिशन के माध्यम से ऐसे अनुप्रयोगों का पर्याप्त विस्तार करना है।
सिंह ने कहा, "13वीं पंचवर्षीय योजना (2018-2022) तक 20,000 मेगावॉट सौर बिजली उत्पादन क्षमता का निर्माण निस्संदेह एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। परंतु मेरा ईमानदारी से मानना है कि यह कार्यान्वित होने योग्य लक्ष्य है और हम सभी को एक प्राथमिक राष्ट्रीय उद्यम के तौर पर इसे हासिल करने के लिए एकाग्रता से काम करना चाहिए।"
मिशन का प्रशासन नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय से होगा। बहरहाल 20,000 मेगावॉट में से केवल 4,000 मेगावॉट बिजली को ही राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड से जोड़े जाने की संभावना है क्योंकि इसमें 20 वर्षो में कुल 2,700 अरब रुपये सब्सिडी खर्च का अनुमान है।
राष्ट्रीय ग्रिड के लिए सौर ऊर्जा पैदा करने वाली कंपनियों को 17.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान किया जाएगा और उपभोक्ताओं से इसकी कीमत 5.50 रुपये प्रति यूनिट वसूली जाएगी। शेष राशि केंद्र सरकार सब्सिडी के रूप में देगी। अगले 20 वर्षो में 4,000 मेगावॉट बिजली की सब्सिडी देने पर 90,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*












Click it and Unblock the Notifications