क्या 2012 में दुनिया मिट जाएगी?
दिलचस्प बात है कि उनकी अगली परियोजना ' जेम्स वेब्स स्पेश टेली स्कोप (जेडब्ल्यूएसटी)' का 2014 में ही प्रक्षेपण होने की योजना है। यह परियोजना पुराने हब्बल अन्तरिक्ष दूरबीन की अगली कड़ी है।
वर्ष 2006 में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले डा. मैथर तिरुवनंतपुरम में 97वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस के दौरान प्रेसवार्ता में हिस्सा ले रहे थे। उन्हें अंतरिक्ष में काले वस्तुओं से विकिरण की खोज के लिए नोबल पुरस्कार मिला था। उन्होंने बताया कि जेडब्ल्यूएसटी यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के एरियन-5 प्रक्षेपण यान के जरिए प्रक्षेपित किया जाएगा।
इससे पहले एक अन्य, नोबेल पुरस्कार विजेता रोगर त्सिएन ने एक छात्र प्रतिनिधि के नोबेल पुरस्कार जीतने के सरल रास्ते के सवाल के जवाब में कहा कि लगातार समर्पण सफलता का मूल मंत्र है। कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रोगर त्सिएन, जिन्हें ग्रीन फ्लूरेसेंट प्रोटीन (जीएफपी) ढूंढने एवं विकसित करने के लिए वर्ष 2008 का नोबेल पुरस्कार मिला था, मीडिया सेंटर में खुला मंच के दौरान प्रतिनिधियों और मीडियाकर्मियों के सवालों के जवाब दे रहे थे।
प्रो. त्सिएन ने बताया कि जीएफपी ट्रैकिंग प्रणाली जीव रसायन के क्षेत्र में कोशिका विभाजन तथा एड्स एवं कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होती है। जीएफपी अमेरिका और कनाडा के बीच के जलडमरूमध्य में पायी जाने वाली जेली मछली में पहचान किया गया। उन्होंने सम्भवत: धरती के बढ़ते तापमान और प्रदूषण की वजह से जेली मछली विलुप्त होते जाने पर चिंता प्रकट की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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