मदरसे के ठप्पे से बाहर निकलना चाहता है जामिया मिलिया : कुलपति
नई दिल्ली, 29 दिसम्बर (आईएएनएस)। जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति नजीब जंग का कहना है कि 90 साल पुराना यह विश्वविद्यालय 'उच्च मदरसे' के ठप्पे से बाहर निकलकर एक आधुनिक और धर्मनिरपेक्ष संस्थान के रूप में अपनी पहचान कायम करना चाहता है।
जंग ने आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में कहा, "हम कोई उच्च श्रेणी के मदरसा नहीं हैं। मुझे नहीं पता कि लोग क्यों सोचते हैं कि यह कोई मुस्लिम विश्वविद्यालय है। हम लोगों के जेहन और इस ठप्पे को बदलना चाहते हैं। हमें उम्मीद है कि ऐसा होगा।"
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे जंग ने चार महीने पहले ही जामिया के कुलपति की जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले मुशीरुल हसन इस पद पर थे।
जंग ने कहा कि जामिया की स्थापना करने वाले वे राष्ट्रवादी लोग थे जिन्होंने पाकिस्तान के गठन का खुलकर विरोध किया था। उन्होंने कहा, "यह एक महान संस्थान है। हम धर्मनिरपेक्ष और आधुनिक हैं। भारत के प्रतिनिधि के रूप में जामिया जैसा कोई दूसरा संस्थान नहीं है।"
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में लगभग 19,000 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं और यहां पढ़ने वाले सिर्फ मुस्लिम ही नहीं बल्कि सभी धर्मो के लोग हैं। उन्होंने कहा कि यहां रमजान और दीवाली का जश्न एक जैसे ही मनाया जाता है।
जंग से पूछा गया कि विश्वविद्यालय को 'मुस्लिम ठप्पे' से निकालने के लिए वह क्या कर रहे हैं तो उन्होंने कहा, "यह बहुत कठिन है। इसमें कुछ जादुई नहीं हो सकता। ऐसा कोई तरीका नहीं है जिसके जरिए आप इस सोच को एक दिन में बदल देंगे। यह धीरे-धीरे समय के साथ होगा।"
कुलपति ने कहा, "हम कश्मीर से केरल तक सभी क्षेत्रों के छात्रों को इसमें लाना चाहते हैं। हम केरल, बिहार, असम, हैदराबाद, कश्मीर, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल.. में अपने प्रवेश परीक्षा केंद्र खोलने जा रहे हैं ताकि सभी जगहों के छात्र जामिया में दाखिला पा सकें।"
विगत चार महीनों की अपनी उपलब्धियों के बारे में जंग ने कहा कि वह मीडिया के प्रचार से दूर हैं। उन्होंने कहा, "छात्रों के साथ मेरा अच्छा तालमेल है। मैं इसी में फक्र महसूस करता हूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications