हर लड़की को सुरक्षा मिले : रुचिका की दोस्त (लीड-1)

लोगों ने कहा कि रुचिका के साथ छेड़खानी कर उसे आत्महत्या करने पर मजबूर करने वाले राठौर को दी गई सजा काफी कम है।

रुचिका की दोस्त अनुराधा ने कहा, "मैं केवल इतना ही कहना चाहता हूं कि हमें देश में हर लड़की को सुरक्षित बनाना होगा। मैं सोचती हूं कि हमारी राजनीतिक और न्यायायिक व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। रुचिका मामले में आए फैसले से इस चीज की जरूरत महसूस की जा रही है।"

एक गैर सरकारी संस्था-गुड गवर्नेस के कार्यकर्ता कनन जायसवाल ने कहा, "यह साफ हो गया है कि रुचिका को हरियाणा पुलिस ने धमकाया था। छेड़छाड़ की उस घटना के बाद भी रुचिका को कई तरह की मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ा था। हम इस मामले की फिर से सुनवाई की मांग करते हैं।"

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने सोमवार को चंडीगढ़ में सुनवाई के दौरान राठौर को 14 साल की रुचिका के साथ छेड़छाड़ का दोषी पाया था और उनके खिलाफ छह महीने की सजा और एक हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई थी।

यह सनसनीखेज मामला 19 पुराना है। राठौर ने 12, अगस्त 1990 को पंचकूला में रूचिका के साथ छेड़छाड़ की थी। इसके तीन वर्ष बाद रुचिका ने हरियाणा पुलिस की यातनाओं से तंग आकर 1993 में आत्महत्या कर ली थी।

रुचिका मामले की सुनवाई को लेकर प्रदर्शन में शामिल एक पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी कमल कांत जायसवाल ने इस बात की जांच की मांग की कि एक बच्ची के साथ शारीरिक छेड़छाड़ करने का आरोप लगे होने के बावजूद आखिरकार राठौर को हरियाणा का पुलिस महानिदेशक किस आधार पर बनाया गया।

दिल्ली की कई अन्य गैर सरकारी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने पत्र लिखकर कानून मंत्री एम. विरप्पा मोइली से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। इसी सिलसिले में लोगों ने जंतर-मंतर पर गुरुवार को मोमबत्तियां जलाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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