जल्दबाजी में राहत पैकेजों की वापसी नहीं : मुखर्जी
वित्त मंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन पैकेज दिए गए थे। अर्थव्यवस्था में पूरी तरह सुधार होने और योजनाकारों के प्रोत्साहन पैकेजों को वापस लेने के आकलन के बाद ही ये वापस लिए जाएंगे।
उन्होंने कहा, "और ऐसी स्थिति अभी तक आई नहीं है।"
23वें भारतीय औद्योगिक व्यापार मेले के उद्घाटन सत्र में मुखर्जी ने कहा कि इस संबध में जी-20 के पिट्सबर्ग शिखर सम्मेलन में एक सहमति बनी थी, जहां भारत का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया था।
मुखर्जी ने कहा कि दुनिया के बड़े देशों की सरकारों ने फैसला किया था कि अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए प्रोत्साहन पैकेजों को दिया जाना चाहिए और उनको वापस लेने में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।
मुखर्जी ने कहा कि अक्टूबर 2008 से भारत के निर्यात में लगातार 13 महीने तक गिरावट आई लेकिन नवंबर 2009 से इसमें सुधार आया।
उन्होंने कहा कि निर्यात में गिरावट घरेलू प्रोत्साहन के अपर्याप्त होने के कारण नहीं वरन यूरोप, उत्तरी अमेरिका और जापान की अर्थव्यवस्था में सुधार नहीं होने के कारण आई। इन देशों को ही भारत का 63 प्रतिशत निर्यात होता है।
उनके अनुसार विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम को इन विकसित देशों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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