तेलंगाना के 11 सांसद और 80 विधायक देंगे इस्तीफा (लीड-4)

इधर, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और अन्य संगठनों के 48 घंटे बंद के आह्वान से हैदराबाद सहित पूरे क्षेत्र में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा।

टीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव ने कहा कि यदि केंद्र सरकार राज्य के गठन की प्रक्रिया जल्द शुरू नहीं करती है तो स्थिति खराब हो जाएगी और सेना को भी संभालने में मुश्किल का सामना करना पड़ेगा।

निजामाबाद से कांग्रेस सांसद मधु याश्की गौड़ और करीमनगर से पार्टी सांसद पूनम प्रभाकर ने कहा कि तेलंगाना की जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।

तेलंगाना से सभी पार्टियों के सांसद नलगोंडा से सांसद जी. सुधाकर रेड्डी के नई दिल्ली स्थित आवास पर बैठक करेंगे। इस बैठक में फैसला किया जाएगा कि इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंपा जाए या फिर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को भेजा जाए।

इस बीच सभी 80 विधायकों ने संयुक्त कार्यसमिति के बैनर तले इस्तीफा देने का फैसला किया है।

इस्तीफा देने का फैसला करने वालों में 30 विधायक राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस और 30 विधायक विपक्षी तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) से हैं। तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस)के सभी 10 विधायक पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं।

गौड़ ने तटीय आंध्र और रायलसीमा के सभी सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों पर तेलंगाना को लेकर ब्लैकमेलिंग की रणनीति अपनाने का आरोप लगाया है।

उन्होंने मौजूदा संकट के लिए कडप्पा से कांग्रेस के सांसद वाई. एस. जगनमोहन रेड्डी को जिम्मेदार ठहराया। गौड़ ने कहा, "कुछ लोग पहले भी पार्टी को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर चुके थे, वे ही इस हालात के जिम्मेदार हैं।"

निजामाबाद से सांसद ने आरोप लगाया कि तेलंगाना के विरोध में विधायकों के इस्तीफे के पीछे राज्यसभा सदस्य और दिवंगत मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी के करीबी के.वी.पी. रामाचंद्र राव का हाथ था।

तेलंगाना क्षेत्र से लोकसभा में 17 सदस्य हैं जिनमें 12 सदस्य कांग्रेस के हैं। टीरआरएस प्रमुख राव सहित उनके दोनों सांसद पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं।

कांग्रेस के ज्यादातर सदस्यों ने जहां इस्तीफे का मन बनाया है, वहीं क्षेत्र के 13 विधायकों ने कहा है कि वे पार्टी आलाकमान के आदेश का पालन करेंगे।

आंध्र प्रदेश की 294 सदस्यीय विधानसभा में तेलंगाना क्षेत्र के 119 विधायक हैं। इनमें से 50 विधायक कांग्रेस के हैं। अगर उनमें से अधिकांश ने इस्तीफा दे दिया तो सरकार अल्पमत में आ जाएगी।

तेदेपा नेता ई. दयाकर राव ने संवाददाताओं को बताया कि पार्टी के सभी 38 विधायकों ने इस्तीफा देने का फैसला किया है।

इस बीच तेलंगाना क्षेत्र में 48 घंटे का बंद हैदराबाद में प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच उस्मानिया विश्वविद्यालय और शहर के अन्य स्थानों पर हुई झड़पों के कारण हिंसक हो गया।

उस्मानिया विश्वविद्यालय में पुलिस द्वारा चलाई गई रबड़ की गोलियों से एक छात्र घायल हुआ। वहां विस्फोटक स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों को भेजा गया।

केंद्र सरकार के रुख में बदलाव के संकेतों के बाद बुधवार रात से ही छात्र हिंसा पर उतर आए और कई बसों तथा ट्रकों में आग लगा दी।

उधर, तनाव के मद्देनजर कानून व व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बल मंगाया जा रहा है।

पुलिस महानिरीक्षक ए.आर.अनुराधा ने कहा, "उस्मानिया विश्वविद्यालय की हालत बहुत खराब है। हम नहीं जानते कि अगले पल यहां क्या घटित होगा।"

पुलिस ने छात्रों के अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे विश्वविद्यालय के छात्रावासों में रह रहे छात्रों को घर वापस बुला लें।

पुलिस महानिरीक्षक ने संवाददाताओं को बताया, "छात्र इस मुद्दे की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं। उनके लिए यह एक खेल है लेकिन यह खेल नहीं है। स्थिति किसी भी तरफ मोड़ ले सकती है।"

इस सबके बीच केसीआर के नाम से मशहूर टीआरएस के अध्यक्ष राव ने गुरुवार को चेतावनी दी कि तेलंगाना राज्य के गठन में किसी प्रकार का विलंब आग को भड़काने वाला होगा, जिसे नियंत्रित कर पाना सेना के लिए भी मुश्किल भरा होगा।

तेलंगाना राज्य के समर्थन में लड़ाई लड़ रहे सभी राजनीतिक दलों ओर समूहों की गठित संयुक्त कार्रवाई समिति की बैठक को संबोधित करते हुए राव ने कहा कि अलग तेलंगाना राज्य के लिए चल रहे आंदोलन को दबाने की केंद्र सरकार की किसी भी रणनीति से क्षेत्र की जनता घबराने वाली नहीं है।

उन्होंने कहा, "तेलंगाना का इतिहास बलिदानों का रहा है। इस क्षेत्र की जनता कुर्बानी देने में भी नहीं हिचकिचाएगी।"

लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके राव ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी अपील की कि वह इस मुद्दे को और नहीं खींचें और तेलंगाना को जल्द से जल्द अलग राज्य घोषित करें।

उन्होंने कहा, "मैं प्रधानमंत्री से अपील करता हूं कि वह जल्द से जल्द तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया आरंभ करें। देश में यदि लोकतंत्र और संविधान है तो हमारी नैतिक मांग को स्वीकार किया जाना चाहिए।"

आंध्र प्रदेश की के. रोसैया सरकार द्वारा तेलंगाना क्षेत्र में बिजली और केबल टेलीविजन संपर्क काट दिए जाने की आलोचना करते हुए कहा कि रोसैया की ताकत भी खत्म होने वाली है क्योंकि तेलंगाना क्षेत्र के सभी विधायक विधानसभा अध्यक्ष पर अपना इस्तीफा स्वीकार कर लेने का दबाव बनाएंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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