धर्मनिरपेक्ष नेपाल को ईसाई नेताओं का इंतजार
काठमांडू, 24 दिसम्बर (आईएएनएस)। नेपाल ने भले ही तीन वर्ष पूर्व खुद को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित कर दिया था लेकिन आज भी इस देश को ईसाई नेताओं के राजनीति की मुख्यधारा से जुड़ने का इंतजार है।
रोम द्वारा वर्ष 2007 में नेपाल में नियुक्त पहले कैथोलिक बिशप रेव एंथनी शर्मा ने कहा, "हमें अपनी अवाज सुनने के लिए ईसाई दल की जरूरत है। अभी भी ईसाई समुदाय के लोग शिक्षा और अवसरों से दूर हैं। इसलिए समुदाय के नेताओं को राजनीति में हिस्सा लेना चाहिए।"
वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार देश की कुल आबादी में ईसाई लोगों की संख्या 0.5 फीसदी है। समुदाय का कहना है कि राजशाही की समाप्ति के बाद ईसाई समुदाय की जनसंख्या बढ़ रही है।
अनुमान के मुताबिक इस वक्त देश में सात लाख से अधिक ईसाई हैं लेकिन इस समुदाय का एक भी व्यक्ति मंत्री या सांसद नहीं है। ईसाई समुदाय इसी सवाल से चिंतित है।
प्रोटेस्टेंट बिशप रेव नारायण शर्मा ने कहा, "पिछले वर्ष जब नेपाल में संविधान सभा का चुनाव हुआ था तो निर्णय लिया गया था कि 601 सदस्यीय संविधान सभा में 240 उम्मीदवार प्रत्यक्ष रूप से चुने जाएंगे और 335 को विभिन्न दल नामित करेंगे।"
शर्मा ने कहा, "विभिन्न दलों ने फैसला किया था कि उन समुदायों से 26 सदस्यों को नामित किया जाएगा, जिनका कोई प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है लेकिन एक भी दल ने ईसाई व्यक्ति को सांसद नामित नहीं किया।"
राजशाही की समाप्ति के बाद सत्ता में आए माओवादियों ने अल्पसंख्यक मुस्लिमों को आकर्षित करने का प्रयास किया था लेकिन वे ईसाई समुदाय को भूल गए। माओवादी प्रमुख पुष्प कमल दहाल प्रचंड ने मुस्लिम आयोग बनाने का वादा किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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