बेंगलुरू की सड़कों पर क्रिसमस की खुशियां बेच रहे हैं बच्चे
दिसम्बर का धुंधभरा मौसम होने के बावजूद क्रिसमस और नए साल का सामान बेचते फेरी वाले बच्चों ने शहर के सड़कों पर उत्सव जैसा माहौल बना दिया है।
वास्तव में पहली बार बेंगलुरू में क्रिसमस के पर्व का आगमन इस तरह से हुआ है, जब बेंगलुरू शहर के बीचों बीच स्थित एम. जी. रोड पर इन बच्चों का एक समूह सड़क के दोनों ओर क्रिसमस सामग्री बेच रहा है।
ग्राहकों से मोल-भाव करते इनमें से ज्यादातर बच्चे अभी अपनी किशोरावस्था में हैं। ये बच्चे क्रिसमस के मौसम को थोड़ा-बहुत पैसा कमाने के अवसर के रूप में देखते हैं।
शहर की ब्रिगेड रोड के व्यस्तम शॉपिंग केंद्र पर सांता की टोपी से खेलते हुए 13 वर्षीय फेरीवाले हैदर अली ने बुधवार को आईएएनएस को बताया, "लोग सांता की टोपी खरीदना पसंद करते हैं। यह टोपी बेंगलुरूवासियों और खासतौर से युवाओं के बीच बहुत लोकप्रिय है।"
हैदर ने बताया कि उसने पिछले 10 दिनों में 300 टोपियां बेची हैं।
बाल अधिकारों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के समय में बेंगलुरू की सड़कों पर रहने वाले बच्चों की तादाद में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।
बेंगलुरू के असहाय बच्चों के लिए काम करने वाले संगठन 'ड्रीम ए ड्रीम' के संस्थापक सदस्य विशाल तलरेजा कहते हैं कि अमीरों और गरीबों के बीच का अंतर बढ़ने के साथ सड़कों पर घूमने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है।
बाल श्रम के खिलाफ अभियान (सीएसीएल) की कर्नाटक इकाई की समन्वयक वी. सुशीला कहती हैं कि यह बहुत दु:ख की बात है कि सरकार द्वारा असहाय बच्चों को बाल श्रम से रोकने के लिए बनाए गए तमाम कानूनों के बावजूद बच्चों पर जीविका कमाने के लिए दबाव बनाया जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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