हेडली के वीजा आवेदन में थी गलत जानकारियां (विशेष)
शिकागो, 24 दिसम्बर (आईएएनएस)। मुंबई पर आतंकवादी हमले के संदिग्ध डेविड कोलमैन हेडली ने भारत के लिए वीजा का आवेदन करते समय उन जानकारियों को जानबूझकर छिपाया जिनसे संदेह पैदा हो सकता था।
हेडली के खिलाफ अमेरिका के संघीय अभियोजक द्वारा दायर आरोपों के अनुसार भारत के लिए यात्री वीजा का आवेदन देते समय हेडली ने अपने जन्म का नाम, पिता का वास्तविक नाम और यात्रा का उद्देश्य गलत लिखा।
आईएएनएस को हासिल जानकारी के अनुसार हेडली ने अपने पिता का नाम विलियम एस.हेडली लिखा। जून 2006 में अपने पहले वीजा आवेदन में उसने अपने जन्म का नाम गलत लिखा और जुलाई 2007 में दूसरे वीजा आवेदन में उसे खाली छोड़ दिया।
विशेष सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि हेडली को वीजा देने के लिए शिकागो के अटार्नी रेमंड सेंडर्स ने एक पत्र लिखा था। सेंडर्स ने तहव्वुर राणा और उसकी पत्नी समराज के साथ खुद भी भारत के वीजा के लिए आवेदन किया था। राणा के दौरे का उद्देश्य उसकी कंपनी फर्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विस के मुंबई स्थित कार्यालय का दौरा करना बताया गया था।
उसके मुंबई कार्यालय का पता ताड़देव वातानुकूलित बाजार, कार्यालय संख्या 2, ताड़देव रोड मुंबई 400034 बताया गया था। बाद में भारतीय अधिकारियों ने इस कार्यालय पर छापा भी मारा।
अमेरिकी अटार्नी कार्यालय से दायर आरोपों के अनुसार हेडली ने अपना दाउद गिलानी का नाम 15 फरवरी 2006 को इसलिए बदला ताकि भारत के समक्ष अपने को एक ऐसे अमेरिकी के रूप में पेश कर सके जो कभी मुस्लिम और पाकिस्तानी नहीं रहा। नाम बदलने के केवल चार महीने बाद उसने पहली भारतीय यात्रा की।
न्यायालय के दस्तावेजों के अनुसार हेडली ने मुंबई में फर्स्ट वर्ल्ड का कार्यालय खोलने के लिए लश्कर-ए-तैयबा से मंजूरी ली। लश्कर के एक संचालक ने फर्स्ट वर्ल्ड के कर्मचारियों को हेडली की असली कारगुजारी को छिपाने के लिए फर्जी कागजात तैयार करने का निर्देश और उसके लिए भारत का वीजा हासिल करने की सलाह दी। न्यायालय के दस्तावेजों में इस संचालक की पहचान केवल 'ए' के रूप में दी गई है।
आईएएनएस को यह भी जानकारी मिली है कि वीजा आवेदन के समर्थन में आव्रजन लॉ सेंटर से एक पत्र भी लिखा गया था।
वीजा आवेदन में कुछ भी असामान्य नहीं पाया गया। अगर कुछ असामान्य पाया जाता तो शिकागो स्थित वाणिज्य दूतावास, नई दिल्ली में गृह मंत्रालय से सलाह करता। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि महावाणिज्य दूत अशोक कुमार अत्री से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा गया है या नहीं।
वाणिज्य दूतावास ने कहा कि हेडली और राणा को वीजा देने में सभी नियमों का पालन किया गया। दूतावास इससे अधिक टिप्पणी नहीं करने का अनिच्छुक था।
हेडली को जहां फरवरी 1997 में नशीली दवाओं की तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया वहीं राणा का कोई आपराधिक अतीत नहीं था। राणा के वैध अमेरिकी पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों के कारण वाणिज्य दूतावास ने उसे वर्ष 2006 और 2007 में दो बार वीजा दिया। राणा और उसकी पत्नी को वर्ष 2008 में एक वर्ष का पर्यटक वीजा दिया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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