राठौर की हल्की सजा पर आक्रोश (राउंडअप)
उल्लेखनीय है कि खुद के साथ हुई बदसलूकी के तीन वर्ष बाद रूचिका ने खुदकुशी कर ली थी।
राठौर को दी गई हल्की सजा के मुद्दे को राज्यसभा में उठाते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की सांसद बृंदा करात ने कहा, "एक अपराधी जिसने पुलिस वेश में अपराध किया और 19 वर्षो तक न्याय से भागता रहा, उस शख्स को पद्दोन्नति से पुरस्कृत किया गया। 19 साल बाद इस अपराधी को दोषी करार दिया गया और सजा क्या मिली-केवल छह महीने कैद।"
करात ने कहा, "और जिस दिन उसे सजा सुनाई गई, उसी दिन 10 मिनट के भीतर उसे जमानत पर मिल गई। क्या यह हम सभी के लिए शर्म की बात नहीं है। आखिर इस तरह की कार्रवाई को हम कब तक बर्दाश्त करते रहेंगे। यह हमारी न्यायिक व्यवस्था में गहरी खामियों को जाहिर करता है।"
करात ने अल्पवयस्कों के यौन शोषण के मामलों में एक द्रुत गति न्यायिक प्रणाली की मांग की और पूरे राज्यसभा में 'शर्म शर्म' की आवाज गूंज उठी।
ज्ञात हो कि सोमवार को रुचिका मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत ने पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.पी.एस.राठौर को महज छह महीने कैद और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। सजा के तुरंत बाद राठौर को जमानत पर रिहा कर दिया गया।
रुचिका की मित्र आराधना गुप्ता ने मंगलवार को कहा कि वह इस बात से खुश है कि मामले को राज्यसभा में उठाया गया। आराधना गुप्ता के परिवार ने रुचिका के लिए न्याय पाने हेतु 19 वर्षो तक लड़ाई लड़ी है।
आराधना ने आईएएनएस से कहा, "रुचिका को खोना मेरे जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी रही है। छह महीने की सजा इसके आगे कुछ भी नहीं है। लेकिन मैं फिर भी खुश हूं कि अल्प सजा का यह मामला राज्यसभा में उठाया गया और अब मुझे उम्मीद है कि यह उचित अंत तक पहुंच सकेगा।"
चंडीगढ़ के सेक्टर छह में घटी छेड़छाड़ की इस घटना की एक मात्र गवाह आराधना ही रही। जब इस मामले में फैसला आया तो वह विशेष तौर पर सिडनी से उड़ कर भारत आई।
इस मामले में चली लंबी लड़ाई से प्रेरणा लेते हुए आराधना ने कहा, "मैं नहीं चाहती कि कोई दूसरी बेगुनाह लड़की किसी वरिष्ठ अधिकारी के कारण शहीद हो जाए। यह भावना पिछले कई वर्षो से मेरे भीतर घुमड़ रही है।"
करात ने कहा कि रुचिका के परिवार के साथ आनंद और मधु प्रकाश की बेटी अराधना 19 वर्षो तक मामले की गवाह के रूप में खड़ी रहीं। उन्होंने कहा, "मेरा कहना है कि हम कब तक ऐसे मामलों को बर्दाश्त करते रहेंगे, जहां लड़कियों के लिए कोई सुरक्षा नहीं है।"
करात ने कहा, "मैं सदन में उपस्थित कानून मंत्री व गृह मंत्री से अपील करती हूं कि कानून में सुधार लाया जाए और शीघ्र न्याय की व्यवस्था की जाए।"
मधु प्रकाश ने कहा, "रुचिका के इस मामले के लिए हमें तीन वर्षो तक प्रताड़ित किया गया। यद्यपि सजा बहुत थोड़ी है, फिर भी इससे थोड़ी उम्मीद जगी है।"
आनंद प्रकाश ने आईएएनएस को अपने आवास पर बताया, "हम राठौर के लिए और अधिक सजा की मांग करेंगे। इस दौरान जिन लोगों ने राठौर का बचाव किया है, उन्हें भी दोषी ठहराया जाना चाहिए। उसकी सभी सुविधाएं, पद और यहां तक की उसका पेंशन भी वापस ले लिया जाना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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