नेपाली माओवादियों ने दी भारत को चुनौती (लीड-1)
काठमांडू, 22 दिसम्बर (आईएएनएस)। नेपाल में माओवादियों की तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल मंगलवार को समाप्त होने के बाद उन्होंने भारत को खुली चुनौती दी कि वह रिमोट नियंत्रित काठमांडू की सत्ताधारी पार्टियों से बातचीत करने के बदले सीधे उनसे बातचीत शुरू करे। माओवादियों ने 24 जनवरी से अनिश्चितकालीन आम हड़ताल शुरू करने की भी धमकी दी।
ढाई दिनों तक चली आम हड़ताल के कारण देश भर में आम जनजीवन प्रभावित रहा और सभी शैक्षणिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। वाहन सड़कों पर नहीं चल पाए। माओवादियों ने मंगलवार को राजधानी काठमांडू के विभिन्न हिस्सों में 'विजय जुलूस' निकाला। ये सभी विजय जुलूस अंतरिम संसद भवन तक गए और वहां संसद भवन के बाहर एक सभा में तब्दील हो गए।
संसद भवन की सुरक्षा में वहां सैकड़ों की संख्या में दंगा पुलिस बल को तैनात किया गया था। इस अवसर पर माओवादियों के प्रमुख पुष्प कमल दहाल प्रचंड ने कहा कि सत्ताधारी पार्टियों के साथ बातचीत लगातार टूट रही है, क्योंकि सत्ताधारी गठबंधन एक रोबोट की तरह है और वह भारत सरकार के आदेशों से नियंत्रित है।
प्रचंड ने कहा, "अतीत में जब राजा ज्ञानेंद्र ने निर्वाचित सरकार को बर्खास्त कर अपनी मर्जी की सरकार गठित कर दी थी, तब सत्ताधारी पार्टियों ने हमसे कहा था कि हम उनके साथ बातचीत करें। लेकिन हमने यह कहते हुए बातचीत से इंकार कर दिया था कि हम नौकरों के साथ नहीं बल्कि राजा के साथ बातचीत करेंगे।"
प्रचंड ने कहा कि लगभग सात साल बाद फिर वही स्थिति आ गई है। लेकिन इस बार राजा नई दिल्ली है।
प्रचंड ने कहा, "हम दिल्ली जाने और बातचीत शुरू करने को तैयार हैं।" प्रचंड ने कहा कि नेपाल में नागरिक प्रभुत्व को भारत द्वारा कुचल दिया गया है।
प्रचंड ने भारतीय सेना प्रमुख दीपक कपूर द्वारा हाल में नई दिल्ली में दिए गए उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि माओवादी गुरिल्लाओं को नेपाली सेना में भर्ती नहीं किया जाना चाहिए।
प्रचंड ने सवाल किया, "क्या वह नेपाल के गवर्नर हैं, क्या वह नेपाली जनता को आदेश दे सकते हैं?"
प्रचंड ने भारत से कहा है कि वह नेपाल के साथ एक छोटे उत्तरी पड़ोसी के रूप में बराबरी का व्यवहार करे। वह नेपाल को कठपुतली या रोबोट के रूप में बदलने की कोशिश न करे।
माओवादियों ने मंगलवार को यह भी संकल्प लिया कि वे जनता को जगाने के लिए क्रिसमस डे से महीने भर का लंबा अभियान शुरू करेंगे। माओवादियों ने चेतावनी दी है कि यदि सत्ताधारी पार्टियां अभी भी समझौता कर पाने में विफल होती हैं तो वे 24 जनवरी से अनिश्चितकालीन राष्ट्रव्यापी हड़ताल करेंगे।
माओवादी सांसद नेत्र बिक्रम चंद ने कहा कि देश भर में विरोध प्रदर्शन अच्छे संविधान के लिए किया गया था। बंद की वजह से देश को 1.2 अरब नेपाली रुपये का घाटा हुआ है।
उल्लेखनीय है कि माओवादी मई में राष्ट्रपति द्वारा सेना प्रमुख की बहाली के आदेश को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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