तिरूपति मंदिर के बगीचे में बूढ़े आम के पेड़ फिर होंगे फलदार

उत्तराखंड के ऋषिकेश में तिरूपति मंदिर का एक करीब 50 साल पुराना आम का बड़ा बगीचा है, जहां के लगभग सभी बूढ़े आम के पेड़ फलविहीन हो गए हैं। सीआईएसएच के वैज्ञानिक अब इन पुराने आम के पेड़ों को फिर से फलदार बनाने जा रहे हैं।

सीआईएसएच के निदेशक एच. रविशंकर ने मंगलवार को आईएएनएस को बताया कि आंध्र प्रदेश के वन अधिकारियों के साथ उन्होंने तिरूपति मंदिर के स्वामित्व वाले बगीचे के आम के पेड़ों के कायाकल्प पर काम शुरू कर दिया है। दिसम्बर के अंत में संस्थान के वैज्ञानिकों का एक दल तिरूपति मंदिर के ऋषिकेश स्थित बगीचे का दौरा कर आम के पेड़ों का बारीकी से निरीक्षण करेगा।

रविशंकर ने कहा कि संस्थान ने आम के बूढ़े पेड़ों को फिर से जवान करके उन्हें फिर से फलदार बनाने की तकनीक खोजी है। उनका यह प्रयोग उत्तर प्रदेश की प्रमुख आम की पट्टी मलिहाबाद में जबरदस्त सफल रहा है और अब वैज्ञानिक इस तकनीक का प्रयोग तिरूपति मंदिर के आम बगीचे पर भी करेंगे।

वैज्ञानिकों के मुताबिक 40-50 साल की आयु के पेड़ों के तने और शिराएं कुछ इस तरह से बढ़ जाती हैं कि सूर्य की रोशनी पूरे पेड़ को ठीक तरह से नहीं पहुंच पाती है और उसके भोजन के लिए जरूरी प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में अड़चन आने लगती है, जिसके परिणामस्वरूप पेड़ की उत्पादकता व अन्य क्षमताओं पर बुरा असर पड़ता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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