भारतीय चिकित्सकों और आस्ट्रेलियाई मदद से इराकी छात्र को मिला नया जीवन
अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक प्रणव कुमार ने आईएएनएस से कहा, "यह बहुत जटिल शल्यक्रिया थी। इस शल्यक्रिया की योजना बनाना और उसे करना बहुत जटिल था और इस लड़के के यहां आने से पहले हमारे पास इस तरह का मामला नहीं आया था।"
अहमद हाशमी को इराक से इलाज के लिए अपोलो अस्पताल में लाया गया था। उनके मस्तिष्क की चार प्रमुख धमनियां अधिक फैल (बिमारी की वजह से धमनियों की दीवारें कमजोर होने की वजह से धमनियों का अधिक चौड़ा होना) गई थीं। वह पहले ही एक मस्तिष्काघात का सामना कर चुका था जिसके परिणामस्वरूप वह ठीक से नहीं बोल पाता है और उसके शरीर का दायां हिस्सा कमजोर हो गया है।
प्रणव कुमार ने कहा कि आगे के खतरे को रोकने के लिए अहमद की इन चारों असामान्य धमनियों को तुरंत बंद कर दिया गया है।
शल्यक्रिया करने वाले चिकित्सकों के दल की एक चिकित्सक शाहिन नूरीएजदान का कहना है कि यद्यपि मस्तिष्क शरीर का एक बहुत छोटा सा हिस्सा है, पर इसे कुल रक्त आपूर्ति के 20 प्रतिशत रक्त की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि अहमद की बीमारी की वजह से मस्तिष्क की रक्त आपूर्ति में रुकावट पैदा हो रही थी और इसकी वजह से वह कभी भी गंभीर मस्तिष्काघात का शिकार हो सकता था और इससे उनकी जान जाने का खतरा था।
अहमद के पिता नहीं हैं। बीमारी का पता चलने के बाद इराक के चिकित्सक उसका इलाज नहीं कर सके तो उसकी बहन ने इंटरनेट के जरिए ऑस्ट्रेलिया की एक फाउंडेशन से इलाज में मदद के लिए संपर्क किया था।
चिकित्सकों का कहना है कि अब अहमद खतरे से बाहर है और वह दो सप्ताह बाद अपने देश लौट सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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