बहू को जलाने की आरोपी 60 वर्षीय महिला बरी

न्यायाधीश आफताब आलम और न्यायाधीश दीपक वर्मा की खंडपीठ ने आजीवन कारावास की सजा पाई शारदा को बरी करते हुए कहा कि उसकी बहू सरला ने मृत्यु पूर्व जो तीन बयान दिए हैं, वह एक-दूसरे से मेल नहीं खाते हैं और इनमें आत्मविश्वास की कमी झलकती है। इन्हीं बयानों के आधार पर शारदा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

खंडपीठ ने मजिस्ट्रेट के समक्ष मृत्युपूर्व दिए गए तीसरे बयान को खारिज करते हुए कहा कि मृत्युपूर्व दिया गया तीसरा बयान हत्या का दोष साबित करने के लिए काफी नहीं है।

खंडपीठ ने इस मामले में मृत्युपूर्व दिए गए दो बयानों को तरजीह दी जिसमें बहू सरला ने खुद के जलने को लेकर अपने ससुराल पक्ष के किसी भी सदस्य पर आरोप नहीं लगाया था और कहा था कि दुर्घटनावश स्टोव के फट जाने की वजह से वह जल गई।

इस मामले में निचली अदालत ने शारदा को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी जिसे राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर खंडपीठ ने बरकरार रखा था।

सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले को पलटते हुए गुरुवार को शारदा को रिहा करने का आदेश दिया।

डूंगरपुर के सत्र न्यायालय ने 16 अगस्त 1999 में सरला के जलने के मामले में शारदा को 2003 में दोषी करार दिया था। राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर खंडपीठ ने 2007 में शारदा की याचिका खारिज कर दी थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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