आडवाणी ने सुषमा स्वराज को सौंपी बागडोर

इसके पहले संसदीय दल ने इस बदलाव का रास्ता साफ करने के लिए अपने संविधान को ध्वनिमत से संशोधित कर दिया। पद त्याग करते समय आडवाणी ने कहा कि उन्होंने राहत और संतोष महसूस किया है। लेकिन उन्होंने कहा कि यह उनके सक्रिय राजनीतिक जीवन का अंत नहीं है।
आडवाणी (82) ने भाजपा संसदीय दल की यहां आयोजित एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा, "यदि लोग सोचते हैं कि मैं अपनी सक्रियता और राजनीति छोड़ दूंगा, तो लोगों का यह सोचना पूरी तरह गलत है। मैं सोचता हूं कि 14 वर्ष की उम्र में जब मैंने हाईस्कूल पास किया था तो स्वयंसेवक बना था और बाद में एक रथ यात्री बना। यह रथ यात्रा जीवन भर चलती रहेगी।"
कैरियर का नया अध्याय
आडवाणी ने कहा, "मैं आप सबके स्नेह और सहयोग के प्रति आभारी हूं। एक समाचार पत्र में आज शुक्रवार को एक शीर्षक 'रथयात्री टू गेट डाउन टुडे' (आज जमीन पर आएगा रथयात्री) छपा है। अखबार में आगे लिखा है कि यह भारतीय राजनीति में एक युग के अंत के रूप में होगा। यह एक बड़ा बयान है। लेकिन मैं सोचता हूं कि मेरे जीवन और राजनीतिक कैरियर में यह एक नया अध्याय है।"
इस अवसर पर भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा, "पार्टी के लिए यह एक झटका है। पार्टी को आडवाणी जी के नेतृत्व की जरूरत है।" भाजपा ने भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए अपने नेतृत्व में एक पीढ़ीगत बदलाव को अपनाया है। राज्यसभा में अरुण जेटली विपक्ष के नेता हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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