मई से लग सकता है नेपाल में राष्ट्रपति शासन : माओवादी सांसद
काठमांडू, 18 दिसम्बर (आईएएनएस)। नए संविधान के अस्तित्व में आने के लिए निर्धारित समय सीमा में अब पांच महीने शेष रह गए हैं और नेपाल सरकार माओवादियों के साथ कोई समझौता कर पाने में फिलहाल विफल साबित हुई है। ऐसे में एक नेपाली सांसद ने संभावना जताई है कि संकटग्रस्त इस देश में मई महीने से राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है।
माओवादी सांसद और पूर्व सूचना एवं संचार मंत्री कृष्ण बहादुर महारा ने कहा कि 28 मई 2010 तक नेपाल में पहली बार यहां की जनता द्वारा खुद से एक लिखित संविधान स्थापित कर दिया जाना चाहिए। चूंकि सत्ताधारी गठबंधन उस समय तक ऐसा नहीं कर पाएगा और इसके बदले वह राष्ट्रपति शासन लागू कर रद्द किए गए 1990 के संविधान को पुनर्जीवित कर देगा।
माओवादी सांसद की चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब माओवादियों ने 20 दिसंबर से तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल की घोषणा कर रखी है।
पूर्व वित्त मंत्री और माओवादी पार्टी के उप प्रमुख बाबूराम भट्टाराई ने आईएएनएस को बताया, "बदलाव व प्रगति की विरोधी सामंती और प्रतिगामी ताकतें नया संविधान नहीं चाहतीं, क्योंकि वह सत्ता को विकेंद्रित कर देगा।"
भट्टाराई ने कहा, "दुनिया में ऐसा उदाहरण कहीं देखने को नहीं मिला है कि किसी सशस्त्र पार्टी ने हथियार डाले हो और उसे सत्ता में भागीदारी से दूर रखा गया हो। यह माओवादियों को अलग-थलग करने की कोशिश है। ऐसे में आप एक लोक संविधान कैसे बना सकते हैं, जब आप उस सबसे बड़ी पार्टी को ही दरकिनार कर रहे हैं, जिसने 40 प्रतिशत वोट और स्पष्ट जनादेश हासिल किया हो।"
माओवादियों ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी पार्टियां नया संविधान रचने के लिए पिछले वर्ष निर्वाचित 601 सदस्यीय संविधान सभा को भंग करने का षड़यंत्र रच रही हैं। माओवादियों ने यह भी कहा है कि पुरानी पार्टियां देश को संघीय राज्य में रूपांतरित करने की प्रक्रिया को ठप करना चाहती हैं, जिसका कि शांति समझौते में संकल्प लिया गया है।
भट्टाराई ने कहा, "इसलिए जनता में जागरूकता पैदा करने के लिए, साथ ही सरकार पर दबाव बनाने के लिए हमने अपने स्तर पर स्वायत्तशासी लोक राज्य की घोषणा करने का एक कार्यक्रम शुरू कर दिया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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