कोपेनहेगन में मनमोहन ने शर्तें रखीं

जलवायु: मनमोहन ने शर्तें रखीं

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन को लेकर भारत और क़दम उठाने को तैयार है बशर्ते विकसित देशों की ओर से विकासशील देशों को आर्थिक सहायता और तकनीक दोनों उपलब्ध करवाए जाएँ.

कोपेनहेगन में चल रहे संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भाग लेने के लिए रवाना होने से पूर्व जारी एक वक्तव्य में उन्होंने कहा है कि वे वहाँ सकारात्मक चर्चाओं की उम्मीद कर रहे हैं. उल्लेखनीय है कि कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए सभी देशों के बीच सहमति बनाने के प्रयास चल रहे हैं.

गुरुवार की शाम तक वहाँ कोई 120 देशों के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री पहुँच रहे हैं और वे किसी सहमति पर पहुँचने का प्रयास करेंगे. हालांकि अभी तक विकासशील और विकसित देशों के बीच मतभेद समाप्त होने के साफ़ संकेत नहीं मिले हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा है, "भारत का दृष्टिकोण है कि वैश्विक तापमान बढ़ रहा है और यह इसी समय घटित हो रहा है और इसका असर भारत जैसे विकासशील देशों पर सबसे अधिक पड़ने वाला है."

उन्होंने कहा कि इसीलिए विश्व समुदाय के एक ज़िम्मेदार सदस्य की तरह भारत पर्यावरण की रक्षा के लिए शेष दुनिया के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है. दुनिया के सभी नागरिकों को समान अवसर की वकालत करते हुए उन्होंने कहा, "विकासशील देशों की ग़रीबी को बनाए रखकर जलवायु परिवर्तन की समस्या को नहीं सुलझाया जा सकता."

उनका कहना था कि उन्होंने 2007 में ही घोषणा कर दी थी कि भारत प्रतिव्यक्ति कार्बन उत्सर्जन को ऐसे स्तर पर रखेगा कि वह विकसित देशों के प्रतिव्यक्ति कार्बन उत्सर्जन से कम रहे.

मनमोहन सिंह ने अपने बयान में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के एक ज़िम्मेदार सदस्य की तरह भारत ने घोषणा की है कि वह वर्ष 2020 तक वर्ष 2005 की तुलना में अपना कार्बन उत्सर्जन 20 से 25 प्रतिशत तक कम करेगा. उन्होंने जलवायु परिवर्तन रोकेने के लिए भारत के व्यापक कार्यक्रम का भी ज़िक्र किया है.

प्रधानमंत्री ने कहा,"कोपेनहेगन सम्मेलन मानवता के साझा आंकांक्षाओं का परिचायक है और इससे जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए वैश्विक प्रयासों का मौक़ा मिल रहा है, मैं वहाँ सकारात्मक चर्चाओं की उम्मीद करता हूँ."

चिंता

इससे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से भी प्रधानमंत्री की कोपेनेहेगन यात्रा पर एक बयान जारी किया गया था. इस बयान में कोपेनहेगन में क़ानूनी रुप से बाध्यकारी समझौते की जगह एक राजनीतिक प्रतिबद्धता ज़ाहिर करने वाले समझौते की संभावनाओं का ज़िक्र करते हुए भारत की ओर से चिंता ज़ाहिर की गई है.

विदेश सचिव निरुपमा राव की ओर से जारी इस बयान में कहा गया है, "हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि नई राजनीतिक प्रतिबद्धता वाले समझौते से कहीं ऐसा न हो जाए कि बाली एक्शन प्लान से ही ध्यान भटक जाए और ऐसा न हो कि विकसित और विकासशील देशों के बीच ज़िम्मेदारियों के बँटवारे की जो सहमति बनी थी वह ख़त्म हो जाए."

उन्होंने कहा है कि ब्राज़ील, दक्षिण अफ़्रीका और चीन के साथ मिलकर काम कर रहा है और वह अफ़्रीकी देशों के मित्र देशों के संपर्क में भी है. विदेश सचिव ने साफ़ किया है कि भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कोपेनहेगन सम्मेलन के बाद जो भी चर्चा हो वह संयुक्त राष्ट्र सिद्धांतों और नियमों के अनुरुप हो और उसमें बाली एक्शन प्लान को भी ध्यान में रखा जाए.

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