कोपेनहेगन में राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा भारत
नई दिल्ली, 16 दिसम्बर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री के कोपेनहेगन के लिए रवाना होने से एक दिन पहले भारत की ओर से बुधवार को कहा गया है कि विकसित देशों द्वारा कार्बन उत्सर्जन में कटौती की जो संख्या बातचीत की मेज पर प्रस्तुत की गई है, वह निराशाजनक है। इसके साथ ही सरकार ने जलवायु सम्मेलन में एक व्यापक, प्रभावी और न्यायसंगत परिणाम की वकालत की है।
विदेश सचिव निरूपमा राव ने जोर देकर कहा है कि भारत कोई अवरोध पैदा करने वाला देश नहीं है और वह कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर बातचीत में एक रचनात्मक भूमिका निभाएगा।
शमन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और वित्त संबंधी प्रमुख मुद्दों पर विकसित और विकासशील देशों के बीच गहरी होती खाई के बीच राव ने यहां संवाददाताओं को बताया, "हम कोई अवरोध खड़ा करने वाले देश नहीं हैं। लेकिन यह भी है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा और उसके संरक्षण के प्रति अडिग बना रहेगा। विकासशील देश पूरी मजबूती के साथ हमारे पीछे खड़े हैं।"
प्रधानमंत्री की दो दिवसीय कोपेनहेगन यात्रा के दौरान राव और जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री के विशेष दूत श्याम सरन प्रधानमंत्री के साथ रहेंगे। पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश पहले से वहां भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन पर भारत की स्थिति के बुनियादी सिद्धांतों को दोहराते हुए राव ने कहा कि भारत कोपेनहेगन में एक व्यापक सर्वमान्य परिणाम चाहता है और विकसित देशों द्वारा कार्बन उत्सर्जन में अधिक कटौती चाहता है।
राव ने एक सवाल के जवाब में कहा, "दुर्भाग्यवश बातचीत की मेज पर विकसित देशों द्वारा कार्बन उत्सर्जन कटौती की जो संख्या प्रस्तुत की गई है, वह निराशाजनक है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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