महंगाई के मुद्दे पर सरकार घिरी, संसद में जोरदार हंगामा (लीड-3)
इस बीच वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने महंगाई के बारे में अपने कार्यालय 'नार्थ ब्लाक' के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा, "यह चिंता की बात है। मुद्रास्फीति का दबाव है, विशेषकर खाद्य पदार्थो पर।"
लोकसभा में अध्यक्ष मीरा कुमार के आसन के समीप विपक्षी सांसद इकट्ठा होकर नारेबाजी करने लगे, जिससे कारण प्रश्नकाल को दो पर स्थगित करना पड़ा।
इसके बाद शून्यकाल में भी हंगामा जारी रहा, लेकिन अध्यक्ष ने सदन में काजकाज जारी रखने की कोशिश की। उन्होंने मंत्रियों से सदन पटल पर कुछ कागजात रखने को कहा। उन्होंने हंगामे के बीच कुछ विधायी कार्य भी पूरा करवाया, लेकिन 12.20 बजे अंतत: उन्हें सदन की कार्यवाही गुरुवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
इससे पूर्व पहले स्थगन के बाद जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा), वाम दलों, राष्ट्रीय जनता दल और बीजू जनता दल के सदस्यों ने लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के आसन के सामने 'महंगाई पर रोक लगाओ' और 'यह सरकार बदलनी है' जैसे नारे लगाए। हंगामा जारी रहने के कारण अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
जिस समय सांसद बढ़ती महंगाई के विरोध में नारेबाजी कर रहे थे, उसी समय तेलुगू देशम पार्टी के सदस्य भी अध्यक्ष के आसन के सामने एकत्रित हो गए। उन्होंने हाथों में "एकीकृत आंध्र प्रदेश" की तख्तियां उठा रखी थीं।
सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होते ही सपा नेता मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में उनकी पार्टी के सदस्य लोकसभाध्यक्ष के आसन के समक्ष एकत्र होकर नारेबाजी करने लगे। वाम दलों के सदस्यों ने भी उनका साथ दिया।
लोकसभाध्यक्ष ने उनसे सदन की मर्यादा बनाए रखने को कहा। उन्होंने कहा कि बढ़ती कीमतों पर 26 नवंबर को चर्चा हो चुकी है। इसके बावजूद सदस्यों ने हंगामा जारी रखा। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 11.30 बजे तक स्थगित कर दी।
सुबह जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण की मांग करते हुए वाम दलों और सपा के सांसदों ने संसद के मुख्यद्वार पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करने वालों में सपा नेता मुलायम सिंह यादव, अमर सिंह, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की नेता वृंदा करात और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के गुरूदास दासगुप्ता शामिल थे।
नेताओं ने कहा कि वे संसद के भीतर और बाहर विरोध जारी रखेंगे।
मुलायम ने कहा, "हम यह मुद्दा सड़कों तक ले जाएंगे। हम सरकार को उसकी नीति बदलने के लिए विवश कर देंगे, नहीं तो इस जनविरोधी सरकार को बदल डालेंगे।"
प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का दायरा बढ़ाने और जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण की मांग की। नेताओं ने कहा कि वे चाहते हैं कि जरूरी वस्तुओं को पीडीएस के दायरे में लाकर रियायती दामों पर उपलब्ध कराया जाए।
उधर, राज्यसभा में तेलंगाना और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।
सुबह 11 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई तेदेपा के सदस्य एकीकृत आंध्रप्रदेश का मुद्दा उठाते हुए पार्टी नेता एम. वी. मयसूरा रेड्डी के नेतृत्व में वेल की ओर बढ़ने लगे।
उसी वक्त वाम दलों के सदस्य भी महंगाई के मुद्दे पर बोलने लगे जिस कारण सभापति हामिद अंसारी ने सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी।
जब 11.30 बजे सदन की बैठक दोबारा शुरू हुई तो वाम दलों के अलावा समाजवादी पार्टी व भारतीय जनता पार्टी ने भी महंगाई का मुद्दा उठाया। हंगामे को देखते हुए सभापति ने सदन की कार्यवाही एक बार फिर दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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