आंध्र के 10 ज़िलों में जीवन अस्त व्यस्त

उमर फ़ारूक़

बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद से

पृथक तेलंगाना को लेकर आंध्र प्रदेश में रविवार को भी जीवन अस्त व्यस्त रहा और 10 ज़िलों में छुटपुट हिंसा की घटनाएँ घटित हुईं.

तेलंगाना विरोधी आंदोलनकारियों ने अनंतपुर के पास एक छोटे स्टेशन में आग लगा दी जिससे ट्रेनों की आवाजाही में बाधा पड़ी.

तेलंगाना के कारण आंतरिक विद्रोह का सामना कर रही कांग्रेस पार्टी के बाद अब तेलुगू देशम में भी विद्रोह के स्वर तेज़ हो गए हैं.

पृथक तेलंगाना की माँग को लेकर विजयवाड़ा में तेलुगू देशम के दो विधायकों- डी उमा महेश्वर राव और सीएच रामा कोट्टइया ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है.

साथ ही तेलंगाना क्षेत्र के तेलुगू देशम के दो विधायकों ने पार्टी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू के रवैए के विरोध में इस्तीफ़ा दे दिया है.

उनका कहना था कि इसके पहले चंद्रबाबू नायडू ने पृथक तेलंगाना के समर्थन का वादा किया था लेकिन अब वो इससे पीछे हट गए हैं.

इधर इसके विरोध में भूख हड़तालों का दौर जारी है. विशाखापत्तनम में आंध्र विश्वविद्यालय के 15 छात्रों का आमरण अनशन तीसरे दिन भी जारी है.

कांग्रेस के विजयवाड़ा से सांसद एल राजगोपाल ने चुनौती दी है कि पृथक तेलंगाना का प्रस्ताव विधानसभा से पारित करके दिखवाएं.

उनका दावा है कि ये गिर जाएगा. उन्होंने आमरण अनशन की भी धमकी है.

लेकिन सबसे पहले इस्तीफ़ा देने वाले कांग्रेस के विधायक दिवाकर रेड्डी ने अपना रुख़ थोड़ा नरम किया है.

उनका कहना था कि अगर केंद्र थोड़े भ्रम दूर कर दे तो इस्तीफ़ा वापस लेने पर पुनर्विचार किया जा सकता है.

इसके पहले शनिवार को अलग तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू करने के विरोध में अभूतपूर्व क़दम उठाते हुए आंध्र प्रदेश कैबिनेट के 20 मंत्रियों ने सामूहिक इस्तीफ़ा दे दिया था.

इस्तीफ़ा देने वाले सारे मंत्री आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र के हैं.

इसी के साथ 33 सदस्यीय मंत्रिमंडल में अब सिर्फ़ 13 मंत्री बचे हैं और ये सब के सब तेलंगाना क्षेत्र से हैं.

इस्तीफ़े के बाद स्थानीय निकाय मंत्री रामनारायण रेड्डी ने पत्रकारों को बताया कि लगभग 140 विधायकों के इस्तीफ़े के बाद मंत्रियों पर भी दबाव था कि वे उनके समर्थन में कुछ क़दम उठाएं.

उन्होंने कहा कि तीन मंत्रियों के एक दल ने मुख्यमंत्री के रोसैया को फ़ैसले से अवगत करा दिया है और आगे की रणनीति का फ़ैसला जल्दी ही किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि इस्तीफ़ा देने वाले मंत्रियों ने संयुक्त आंध्र प्रदेश के लिए लड़ने का फ़ैसला किया है.

रामनारायण रेड्डी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अब भी राज्य और केंद्र सरकार अलग तेलंगाना के मामले पर पुनर्विचार करेगी.

अलग तेलंगाना राज्य बनाने की माँग तो पहले से उठती रही है लेकिन इस मुद्दे पर इतना बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक संकट इससे पहले कभी पैदा नहीं हुआ.

आंध्र प्रदेश के विभाजन के विरोध में सत्तारुढ कांग्रेस, प्रजा राज्यम और तेलुगूदेशम पार्टी के 140 विधायक पहले ही इस्तीफ़ा दे चुके हैं.

ऐसे में मुख्यमंत्री के रोसैया के हाथ बंधे हुए हैं और वे सिर्फ़ इतना कह रहे हैं कि पार्टी हाईकमान जो कहेगा वे उसे मानेंगे.

हालांकि विधानसभा स्पीकर ने अभी तक विधायकों के इस्तीफ़े स्वीकार नहीं किए हैं. उनका कहना है कि वो संवैधानिक जानकारों से सलाह मशविरा कर रहे हैं.

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